जल संरक्षित हरियाणा: विश्व बैंक सहयोग से जल-आत्मनिर्भर राज्य की ओर
नई दिल्ली, 24 जनवरी। हरियाणा को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए प्रदेश सरकार ने विश्व बैंक के सहयोग से ‘जल संरक्षित हरियाणा परियोजना’ को मंजूरी दिलाई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दूरदर्शी नेतृत्व में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत लगभग 5,700 करोड़ रुपये के तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग (ऋण) को स्वीकृति प्रदान की गई है, जो वर्ष 2026 से 2032 तक चरणबद्ध रूप से उपयोग में लाया जाएगा।
चंडीगढ़ में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना के पूरा होने पर प्रदेश की सभी नहरों का नेटवर्क पक्का हो जाएगा, जो आने वाले 25 वर्षों तक बिना बड़े नवीनीकरण के सुचारू रूप से कार्य करेगा। वर्तमान में प्रदेश की 1,570 नहरों में से 892 नहरों का पुनर्वास हो चुका है, जबकि शेष 678 नहरों का पुनर्वास अगले पाँच वर्षों में किया जाएगा। इसके लिए विश्व बैंक, राज्य बजट और नाबार्ड के संयुक्त सहयोग से हजारों करोड़ रुपये की योजनाएँ लागू की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के अंतर्गत नहरी खालों के पुनर्वास, सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के विस्तार, जलभराव की समस्या के समाधान और भूजल पुनर्भरण को मजबूत करने जैसे बहुआयामी कार्य किए जाएंगे। लगभग 70,000 एकड़ कृषि भूमि में माइक्रो-इरिगेशन, 2 लाख एकड़ क्षेत्र में जलनिकासी व्यवस्था तथा दक्षिणी हरियाणा में 80 नए जल निकायों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके साथ ही, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों से उपचारित जल के पुनः उपयोग से 28,000 एकड़ भूमि की सिंचाई सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि इस परियोजना से न केवल किसानों को सेम और जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी, बल्कि अतिरिक्त 2 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा भी प्राप्त होगी। सिंचाई में ताजे पानी की खपत घटने से पेयजल के लिए अधिक जल उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने किसानों से धान की फसल में अधिक से अधिक सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली अपनाने की अपील करते हुए अधिकारियों को व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
विश्व बैंक ने ‘जल संरक्षित हरियाणा’ कार्यक्रम को राज्य के जल प्रबंधन दृष्टिकोण में एक “आदर्श बदलाव” बताते हुए सरकार के नेतृत्व की सराहना की है। औद्योगिक क्षेत्रों के लिए पाइपलाइन से पेयजल आपूर्ति, लिंक चैनल निर्माण और भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना हरियाणा को न केवल देश का पहला ‘वॉटर सिक्योर’ राज्य बनाने की दिशा में अग्रसर करेगी, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, सतत और समावेशी जल भविष्य का मजबूत आधार भी तैयार करेगी।
