नई दिल्ली, 18 मार्च 2026: भारत सरकार ने देश के सौर ऊर्जा क्षेत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने सौर इंगोट्स और वेफर्स को भी अनुमोदित मॉडल और निर्माता सूची (ALMM) के दायरे में शामिल करने का फैसला किया है। यह नया प्रावधान 1 जून 2028 से लागू होगा।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस फैसले को भारत की सौर आपूर्ति श्रृंखला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।
घरेलू सौर उद्योग को बड़ा बढ़ावा
भारत सरकार ने सौर ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सौर इंगोट्स और वेफर्स को भी अनुमोदित मॉडल और निर्माता सूची (ALMM) के दायरे में शामिल कर दिया है। यह नया नियम 1 जून 2028 से लागू होगा। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इसे भारत की सौर आपूर्ति श्रृंखला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम बताया है।
ALMM क्या है और इसका विस्तार क्यों जरूरी है
ALMM एक सरकारी गुणवत्ता और विश्वसनीयता ढांचा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि सौर परियोजनाओं में उपयोग होने वाले उपकरण निर्धारित मानकों पर खरे उतरें और घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिले। अब तक इसमें सौर मॉड्यूल और सेल शामिल थे, लेकिन अब इंगोट्स और वेफर्स को जोड़कर इसे और व्यापक बना दिया गया है। यह कदम इसलिए भी जरूरी था क्योंकि वेफर्स का उत्पादन अभी तक भारत में सीमित है और देश काफी हद तक आयात पर निर्भर है।
नए नियमों की मुख्य बातें
सरकार के नए प्रावधानों के अनुसार 1 जून 2028 से सभी सौर परियोजनाओं में ALMM सूचीबद्ध वेफर्स का उपयोग अनिवार्य होगा। यह नियम नेट मीटरिंग और ओपन एक्सेस परियोजनाओं पर भी लागू होगा। साथ ही, जो कंपनियां ALMM सूची-III में शामिल होना चाहती हैं, उनके पास इंगोट निर्माण क्षमता होना भी आवश्यक होगा, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती आएगी। शुरुआती सूची तभी जारी की जाएगी जब कम से कम तीन स्वतंत्र निर्माताओं के पास कुल 15 गीगावाट की उत्पादन क्षमता उपलब्ध हो।
देश को मिलने वाले बड़े फायदे
इस फैसले से भारत में सौर विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। घरेलू निवेश बढ़ेगा, नई फैक्ट्रियां स्थापित होंगी और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों का असर भी घटेगा। सौर उपकरणों की गुणवत्ता और ट्रेसबिलिटी में सुधार होगा, जिससे देश की ऊर्जा प्रणाली और मजबूत बनेगी।
2030 के लक्ष्य की दिशा में मजबूत कदम
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। ALMM के इस विस्तार से इस लक्ष्य को हासिल करने में गति मिलेगी। पहले ही इस योजना के कारण सौर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता 8.2 गीगावाट से बढ़कर लगभग 172 गीगावाट हो चुकी है, जबकि सौर सेल उत्पादन भी तेजी से बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर, इंगोट्स और वेफर्स को ALMM में शामिल करना भारत को सौर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल घरेलू उद्योग को मजबूत करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक सौर विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में भी आगे बढ़ाएगा।
