नई दिल्ली, 18 मार्च 2026:भारत का विमानन क्षेत्र तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है और आज देश वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है। हर दिन भारतीय हवाई अड्डों पर पांच लाख से अधिक यात्री सफर कर रहे हैं, जो इस क्षेत्र की तेज़ी से बढ़ती मांग और विस्तार को दर्शाता है। इसी के साथ सरकार अब यात्रियों की सुविधा और अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नए कदम उठा रही है।
यात्रियों के लिए सरकार की बड़ी पहल
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुविधाएं शुरू की हैं। इनमें किफायती भोजन के लिए “उड़ान यात्री कैफे”, मुफ्त किताबों के लिए “फ्लाईब्ररी” और हवाई अड्डों पर निःशुल्क वाई-फाई जैसी सेवाएं शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य हवाई यात्रा को अधिक सुलभ, किफायती और सुविधाजनक बनाना है।
DGCA के नए सख्त निर्देश
यात्रियों की सुविधा, पारदर्शिता और सभी एयरलाइनों में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने कई अहम निर्देश जारी किए हैं। अब एयरलाइनों को कम से कम 60 प्रतिशत सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क के आवंटित करनी होंगी। एक ही पीएनआर पर यात्रा करने वाले यात्रियों को साथ बैठाना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, खेल उपकरण, संगीत वाद्ययंत्र और पालतू जानवरों की ढुलाई के लिए पारदर्शी और स्पष्ट नीतियां बनाना जरूरी किया गया है। उड़ानों में देरी, रद्द होने या बोर्डिंग से इनकार की स्थिति में यात्रियों के अधिकारों का सख्ती से पालन करना भी अनिवार्य होगा। साथ ही, इन अधिकारों की जानकारी एयरलाइन वेबसाइट, ऐप और एयरपोर्ट काउंटर पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी, वह भी क्षेत्रीय भाषाओं में।
IndiGo विवाद के बाद बढ़ी सख्ती
हाल के समय में से जुड़े मामलों में यात्रियों की शिकायतें सामने आई थीं, जिनमें सीट आवंटन, देरी और सेवाओं को लेकर असंतोष जताया गया था। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया कि यात्रियों के अधिकारों को और मजबूत करने की जरूरत है।
सरकार के नए निर्देशों को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां एयरलाइनों को जवाबदेह बनाने और यात्रियों के साथ पारदर्शी व्यवहार सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
यात्रियों के अधिकारों पर विशेष जोर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यात्रियों के अधिकारों के ढांचे का कड़ाई से पालन किया जाएगा। अब हर यात्री को अपनी यात्रा से जुड़ी पूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी, जिससे शिकायतों में कमी आएगी और विश्वास बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, सरकार के ये कदम भारतीय विमानन क्षेत्र को केवल विस्तार ही नहीं दे रहे, बल्कि इसे अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और यात्री-केंद्रित भी बना रहे हैं। आने वाले समय में यह पहल न केवल यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाएगी, बल्कि भारत को वैश्विक विमानन मानकों के अनुरूप भी स्थापित करेगी।
