नई दिल्ली, 01 जनवरी 2026 — हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मानसून से पहले जलभराव और बाढ़ की संभावनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की सभी ड्रेनों की समय रहते सफाई सुनिश्चित की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। उन्होंने जिला उपायुक्तों को बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।
हरियाणा राज्य सूखा राहत एवं बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 57वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने 637.25 करोड़ रुपये की 388 बाढ़ नियंत्रण योजनाओं को मंजूरी दी। इनमें जिला उपायुक्तों द्वारा प्रस्तावित 102 करोड़ रुपये की 59 योजनाएं भी शामिल हैं। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 और 2025 में राज्य को जलभराव व बाढ़ की गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ा, जिससे सबक लेते हुए इस बार पहले से ठोस रणनीति बनाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां भी जल निकासी या तटबंध से जुड़ी समस्या हो, वहां तुरंत सुधार कार्य कराया जाए क्योंकि अभी पर्याप्त समय उपलब्ध है।
नदियों के किनारे तटबंधों को मजबूत करने पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि कटाव रोकने के लिए उत्तर प्रदेश की तर्ज पर आधुनिक तकनीक से स्टोन स्टड लगाए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि इस वर्ष सभी स्टोन स्टड नई तकनीक से बनाए जाएं तथा बजरी से भरे कट्टे पहले से तैयार रखे जाएं, ताकि अधिक जल प्रवाह की स्थिति में तुरंत उपयोग किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में अनट्रीटेड गंदा पानी यमुना में न जाए। सभी ड्रेनों के आउटफॉल प्वाइंट्स चिन्हित कर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए। साथ ही भिवानी-घग्गर ड्रेन की क्षमता बढ़ाने का कार्य भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में उन योजनाओं की भी समीक्षा की गई जो समय पर पूरी नहीं हो सकीं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनवरी के अंत तक सभी योजनाओं के टेंडर अनिवार्य रूप से लगाए जाएं और जल्द ही इस विषय पर एक और समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। उन्होंने ट्रीटेड वॉटर के कृषि एवं औद्योगिक उपयोग की संभावनाओं पर भी जोर देते हुए कहा कि जल पुनः उपयोग सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
