नई दिल्ली/चंडीगढ़, 9 मार्च। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा ट्रैवल एजेंटों का पंजीकरण और विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 में केवल एक तकनीकी संशोधन किया गया है, जो केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के सुझावों के अनुरूप है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संशोधन के माध्यम से कानून को केंद्रीय प्रावधानों के साथ समन्वित किया गया है और इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री सोमवार को हरियाणा विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान सदन में प्रस्तुत इस संशोधन विधेयक पर बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि यह विधेयक हरियाणा ट्रैवल एजेंटों का पंजीकरण और विनियमन अधिनियम, 2025 में आवश्यक संशोधन करने के उद्देश्य से लाया गया है, ताकि विदेश रोजगार से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया को और मजबूत किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने सदन को जानकारी देते हुए कहा कि संशोधित प्रावधानों के अनुसार यदि कोई ट्रैवल एजेंट किसी व्यक्ति को विदेश में सेवा या रोजगार के लिए भेजता है और उसके लिए वर्क परमिट की व्यवस्था करता है, तो उसे संबंधित केंद्रीय अधिनियम के तहत अपना पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही ट्रैवल एजेंट को विदेश रोजगार से संबंधित सभी आवश्यक सूचनाएं निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपलब्ध करानी होंगी, ताकि युवाओं के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी या अवैध गतिविधि को रोका जा सके।
नायब सिंह सैनी ने बताया कि जब यह विधेयक पहले सदन में पारित हुआ था, तब राज्य सरकार ने इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा था। इसके बाद राष्ट्रपति सचिवालय ने इसे विदेश मंत्रालय को भेजा, जहां से सुझाव मिला कि विधेयक को केंद्रीय कानूनों और मंत्रालय के प्रावधानों के अनुरूप संशोधित किया जाए। उन्हीं सुझावों के आधार पर राज्य सरकार ने इसमें आवश्यक तकनीकी संशोधन करते हुए इसे दोबारा सदन में प्रस्तुत किया है।
उन्होंने कहा कि विदेश से जुड़े मामलों में राज्य सरकार को हमेशा विदेश मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और केंद्रीय कानूनों के अनुरूप ही प्रावधान करने पड़ते हैं। पिछले समय में जब यह विधेयक भेजा गया था, उस दौरान तीन नए कानून लागू हो गए थे, जिसके चलते विधेयक में कुछ तकनीकी संशोधन करना आवश्यक हो गया था।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार के संकल्प पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति प्रदेश के युवाओं को अवैध तरीके से ‘डंकी रूट’ के माध्यम से विदेश भेजने का प्रयास करेगा, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी युवा अवैध रास्तों के जरिए विदेश जाने के जोखिम में न पड़े।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह कानून पूरी तरह भारत के संविधान और केंद्रीय प्रावधानों के अनुरूप बनाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बनाए जाने वाले सभी कानून संविधान की भावना और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होने चाहिए। यदि केंद्र सरकार या संबंधित मंत्रालय किसी संशोधन का सुझाव देता है, तो राज्य सरकार का दायित्व है कि वह उसके अनुरूप आवश्यक बदलाव करे।
उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार किसी भी स्थिति में केंद्रीय कानूनों के विरुद्ध नहीं जा सकती। इसलिए यह संशोधन पूरी तरह संवैधानिक प्रावधानों और केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप लाया गया है, जिससे प्रदेश के युवाओं की सुरक्षा और विदेश रोजगार की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाया जा सके।
