नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में दो दिवसीय नौवें राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन (NSSC) 2026 का उद्घाटन किया। सम्मेलन में देश की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों पर व्यापक मंथन किया जा रहा है। आतंकवाद, कट्टरपंथ, साइबर अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध घुसपैठ, सूचना युद्ध और नई तकनीकों से उत्पन्न सुरक्षा खतरों जैसे विषय सम्मेलन के केंद्र में हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के तहत वर्ष 2021 से राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन का आयोजन हर वर्ष हाइब्रिड प्रारूप में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे अधिकारियों के अनुभव और विषय-विशेषज्ञों की विशेषज्ञता को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जटिल चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तैयार करना है।
शहीद स्तंभ पर वीर जवानों को श्रद्धांजलि
सम्मेलन के उद्घाटन से पहले गृह मंत्री अमित शाह ने शहीद स्तंभ पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने आसूचना ब्यूरो (IB) के उन बहादुर अधिकारियों और कर्मियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने देश की सुरक्षा, एकता और अखंडता की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
यह श्रद्धांजलि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सुरक्षा कर्मियों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता को दर्शाती है।

देशभर के करीब 850 अधिकारी हुए शामिल
दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन हाइब्रिड फॉर्मेट में किया गया है। इसमें देशभर से लगभग 850 अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।
नई दिल्ली में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री, केंद्रीय गृह सचिव, उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और केंद्रीय पुलिस संगठनों (CPOs) के प्रमुख सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
वहीं राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक (DGP), युवा और जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न विशेषज्ञ क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने-अपने राज्यों की राजधानियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्मेलन में जुड़े।
आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ मजबूत रणनीति
सम्मेलन के पहले दिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें आतंकवाद और कट्टरपंथ से मुकाबला, खुफिया सूचनाओं का एकीकरण, नशीले पदार्थों पर नियंत्रण, अवैध प्रवासियों की पहचान, साइबर अपराध और पाकिस्तान की प्रॉक्सी वॉर जैसे विषय प्रमुख रहे।
आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए गृह मंत्री ने MHA की ‘प्रहार’ (PRAHAAR) योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया।
उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने के लिए बेहतर प्रशिक्षण, आतंकवाद और गंभीर अपराधों से जुड़े फरार आरोपियों को वापस लाने तथा उनके खिलाफ मुकदमों में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया।
गृह मंत्री ने ‘ट्रायल इन एब्सेंशिया’ यानी आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमे की कार्यवाही से जुड़े कानूनी प्रावधानों के प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर दिया।
UAPA मामलों में एकीकृत जांच पर जोर
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए अमित शाह ने UAPA मामलों की जांच में व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद और संगठित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अलग-अलग एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने और कार्रवाई में बेहतर तालमेल जरूरी है।
AI से होगा इंटेलिजेंस डेटा का विश्लेषण
सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए तकनीक के बढ़ते महत्व पर भी विशेष ध्यान दिया गया। गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध विशाल मात्रा में खुफिया सूचनाओं का AI आधारित विश्लेषण किया जाए।
इसका उद्देश्य अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं का बेहतर विश्लेषण करके संभावित सुरक्षा खतरों की पहचान करना और उनके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOPs) तैयार करना है।
AI और डेटा एनालिटिक्स का प्रभावी इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों को संभावित खतरों की समय रहते पहचान करने और तेजी से निर्णय लेने में मदद कर सकता है।
घुसपैठ और अवैध प्रवास पर ‘जीरो टॉलरेंस’
गृह मंत्री ने अवैध प्रवासियों और घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने संबंधित एजेंसियों को अवैध घुसपैठ की पहचान, निगरानी और उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए एक व्यापक सुरक्षा ढांचा तैयार करने के निर्देश दिए।
यह विषय विशेष रूप से सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
ड्रग्स और साइबर अपराध भी सुरक्षा एजेंडे में
सम्मेलन में नशीले पदार्थों की तस्करी और इसके नेटवर्क पर नियंत्रण के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
इसके साथ ही तेजी से बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल माध्यमों से राष्ट्रीय सुरक्षा को उत्पन्न होने वाले खतरों पर भी विचार किया गया। आधुनिक समय में साइबर स्पेस के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों के बीच तकनीकी क्षमता और समन्वय को मजबूत करना सम्मेलन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा।
दूसरे दिन नई तकनीकों और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा
सम्मेलन के दूसरे दिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उभरते खतरों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें सब-एरियल सिस्टम से उत्पन्न खतरे, ब्लू इकोनॉमी की सुरक्षा, इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर और बायो-सिक्योरिटी फ्रेमवर्क जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
ड्रोन और अन्य हवाई प्रणालियों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इनसे उत्पन्न संभावित सुरक्षा चुनौतियों और उनसे निपटने की रणनीति पर भी चर्चा महत्वपूर्ण होगी।
वहीं भारत की बढ़ती ब्लू इकोनॉमी और समुद्री संसाधनों की सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जाएगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘Whole of Government’ दृष्टिकोण
राष्ट्रीय सुरक्षा की मौजूदा चुनौतियां अब केवल पारंपरिक सीमा या कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। साइबर स्पेस, ड्रोन, AI, सूचना युद्ध, जैव सुरक्षा, संगठित अपराध और सीमा पार आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन इसी समन्वित और व्यापक दृष्टिकोण को मजबूत करने का मंच है, जहां वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर काम कर रहे युवा अधिकारी और विषय विशेषज्ञ भी अपने अनुभव और समाधान साझा करते हैं।
सुरक्षा नीति में तकनीक और जमीनी अनुभव का संगम
NSSC 2026 का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते स्वरूप के अनुरूप नीति, तकनीक, खुफिया जानकारी और जमीनी अनुभव को एक साथ जोड़ना है।
आतंकवाद से लेकर साइबर अपराध तक और घुसपैठ से लेकर ड्रोन तथा सूचना युद्ध तक-सुरक्षा चुनौतियों का स्वरूप लगातार बदल रहा है। ऐसे में AI आधारित इंटेलिजेंस, बेहतर अंतर-एजेंसी समन्वय, प्रशिक्षित सुरक्षा बल और स्पष्ट SOPs भारत की सुरक्षा रणनीति को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन 2026 का संदेश स्पष्ट है–बदलते सुरक्षा खतरों के दौर में सतर्कता, तकनीकी क्षमता, खुफिया समन्वय और त्वरित कार्रवाई ही सुरक्षित एवं सशक्त भारत की मजबूत नींव है।
