21 दिनों में 7,000 किमी का सफर पूरा, बंजारा एकता संकल्प यात्रा के समापन पर गूंजीं समाज के अधिकारों की छह बड़ी मांगें
नई दिल्ली, 27 जुलाई 2026। देशभर के बंजारा समाज को शिक्षा, संगठन, सामाजिक जागरूकता और संवैधानिक अधिकारों के सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से निकली ‘बंजारा एकता संकल्प यात्रा’ का सोमवार को राजधानी दिल्ली में भव्य समापन हुआ। दिल्ली कर्नाटक संघ के सभा भवन में आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों समाजबंधुओं ने भाग लेकर एक शिक्षित, संगठित, सशक्त और आत्मनिर्भर बंजारा समाज के निर्माण का सामूहिक संकल्प दोहराया।
यह यात्रा 5 जुलाई 2026 को संत श्री सेवालाल महाराज की जन्मस्थली सेवागढ़ (गुत्ती, आंध्र प्रदेश) से प्रारंभ हुई थी। 21 दिनों तक लगभग 7,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए यात्रा 18 राज्यों और 80 से अधिक जिलों से होकर गुजरी। इस दौरान समाज के बीच शिक्षा, सामाजिक सुधार, संवैधानिक अधिकार, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का संदेश पहुँचाया गया।

“शिक्षा, संगठन और जागरूकता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत” : सत्य कुमार यादव
समापन समारोह के मुख्य अतिथि आंध्र प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सत्य कुमार यादव ने कहा कि उनका संत श्री सेवालाल महाराज की जन्मस्थली सेवागढ़ से विशेष आध्यात्मिक जुड़ाव रहा है। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले उन्होंने संत श्री सेवालाल महाराज का आशीर्वाद लिया था और समाज के सहयोग व संतों के आशीर्वाद से उन्हें विधायक बनने तथा बाद में मंत्री के रूप में जनता की सेवा करने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि “शिक्षा, संगठन और सामाजिक जागरूकता ही बंजारा समाज की प्रगति का सबसे सशक्त मार्ग है।” उन्होंने युवाओं से शिक्षा को अपनाने, नशामुक्त जीवन जीने और सामाजिक कुरीतियों को त्यागने का आह्वान किया। उनका कहना था कि यह यात्रा समाज में नई चेतना, आत्मविश्वास और सामाजिक एकजुटता का संचार करेगी।
सत्य कुमार यादव ने यह भी आश्वासन दिया कि यात्रा के दौरान समाज द्वारा प्रस्तुत छह प्रमुख मांगों को वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक अवश्य पहुँचाएंगे।
“लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा समाज के अधिकारों का संघर्ष” : श्री श्री महाराज
यात्रा के राष्ट्रीय संयोजक श्री श्री महाराज ने कहा कि बंजारा समाज की समस्याओं के समाधान के लिए उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि संगठन ही किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति है और समाज को प्रेम, भाईचारे तथा एकता के साथ आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने घोषणा की कि आने वाले महीनों में वे देश के विभिन्न राज्यों का दौरा कर समाज की समस्याओं और मांगों को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से सरकारों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने समाज से अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को और अधिक मजबूत करने का आह्वान किया।

पूर्व सांसद डॉ. उमेश जी. जाधव ने रखीं छह प्रमुख मांगें
समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद (कलबुर्गी) डॉ. उमेश जी. जाधव ने कहा कि बंजारा एकता संकल्प यात्रा केवल एक सामाजिक यात्रा नहीं, बल्कि समाज के सम्मान, अधिकार और समावेशी विकास का राष्ट्रीय जनआंदोलन है। उन्होंने यात्रा के दौरान उठाई गई छह प्रमुख मांगों को विस्तार से रखा:-
- देशभर में सभी बंजारा उपसमूहों को समान रूप से अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा सुनिश्चित किया जाए।
- गोर बोली को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
- आगामी राष्ट्रीय जातीय जनगणना में सभी उपसमूहों की एक समान पहचान “बंजारा” नाम से दर्ज की जाए।
- बंजारा तांडों एवं समाज के समग्र विकास के लिए राष्ट्रीय बंजारा/तांडा विकास निगम की स्थापना की जाए।
- समाज के युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार एवं सशक्तिकरण की विशेष योजनाएँ लागू की जाएँ।
- संत श्री सेवालाल महाराज की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जाएँ।
डॉ. जाधव ने कहा कि यदि इन मांगों पर गंभीरता से कार्य किया जाता है तो इससे बंजारा समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी।

एकता और जागरण का नया अध्याय
समारोह के अंत में आयोजकों ने संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, विभिन्न राज्यों के सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों और देशभर के लाखों समाजबंधुओं का आभार व्यक्त किया। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि 21 दिनों की यह ऐतिहासिक यात्रा बंजारा समाज में एक नई सामाजिक चेतना, संगठनात्मक शक्ति और अधिकारों के प्रति जागरूकता का मजबूत आधार बनेगी।
बंजारा एकता संकल्प यात्रा ने यह संदेश दिया कि जब समाज शिक्षा, संगठन और जागरूकता के साथ आगे बढ़ता है, तब परिवर्तन केवल संभव ही नहीं, बल्कि निश्चित हो जाता है।
