नई दिल्ली, 17 April 2026 : संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर देशभर में चल रही बहस के बीच केंद्रीय गृह मंत्री ने लोकसभा में बेहद स्पष्ट, तथ्यात्मक और प्रभावशाली तरीके से अपनी बात रखी। उन्होंने विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे उस बड़े नैरेटिव को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें यह दावा किया जा रहा था कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारत की राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी।
गृह मंत्री ने साफ शब्दों में कहा “न किसी राज्य की सीट कम होगी, न किसी क्षेत्र के साथ अन्याय होगा।” बल्कि उन्होंने जो आंकड़े पेश किए, वे यह दर्शाते हैं कि दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व पहले से कहीं अधिक मजबूत होने जा रहा है।
दक्षिण भारत को मिलेगा अभूतपूर्व लाभ
गृह मंत्री ने सदन में संभावित आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है
- कर्नाटक: 28 से बढ़कर 42 सीटें
- आंध्र प्रदेश: 25 से बढ़कर 38 सीटें
- तेलंगाना: 17 से बढ़कर 26 सीटें
- तमिलनाडु: 39 से बढ़कर 59 सीटें
ये आंकड़े केवल वृद्धि नहीं दर्शाते, बल्कि यह भी बताते हैं कि केंद्र सरकार हर क्षेत्र को उसके जनसंख्या अनुपात के अनुसार न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्ध है।
“भ्रम फैलाना बंद करें”विपक्ष को सख्त संदेश
गृह मंत्री ने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर जनता में डर और भ्रम पैदा कर रहे हैं। उन्होंने इसे “भ्रांतियों की राजनीति” करार दिया और कहा कि तीन नए विधेयकों को लेकर दक्षिण भारत के खिलाफ माहौल बनाना पूरी तरह निराधार है।
उनका स्पष्ट संदेश था “देश को गुमराह करने की राजनीति अब ज्यादा दिन नहीं चलेगी, जनता सच समझ चुकी है।”
संवैधानिक प्रक्रिया, पारदर्शिता की गारंटी
गृहमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि परिसीमन कोई मनमाना निर्णय नहीं है, बल्कि यह एक संवैधानिक और संस्थागत प्रक्रिया है:
- संसद की स्वीकृति आवश्यक
- राष्ट्रपति की मंजूरी अनिवार्य
- परिसीमन आयोग की भूमिका निर्णायक
इससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और लोकतांत्रिक हो।
आगामी चुनावों पर कोई असर नहीं
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक नया परिसीमन लागू नहीं होता, तब तक सभी राज्यों जैसे और में चुनाव पुरानी सीटों और मौजूदा व्यवस्था के तहत ही होंगे।
इस बयान ने उन आशंकाओं को भी समाप्त कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि आगामी चुनावों में सीटों का बड़ा फेरबदल होगा।
विपक्ष को भी बराबर भागीदारी का अवसर
गृह मंत्री ने एक महत्वपूर्ण बात यह भी कही कि परिसीमन आयोग में विपक्ष अपने प्रतिनिधि शामिल कर सकता है। यानी यह प्रक्रिया केवल सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
यह कदम सरकार की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कांग्रेस पर तीखा हमला
प्रियंका गांधी के “मैनिपुलेशन” वाले आरोपों पर जवाब देते हुए ने कहा कि अगर देश में कभी प्रक्रियाओं के साथ छेड़छाड़ हुई है, तो वह कांग्रेस के शासनकाल में हुई है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा सरकार “पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रहित” के सिद्धांतों पर चलती है, न कि राजनीतिक लाभ के लिए संस्थाओं का दुरुपयोग करती है।
चुनावी टाइमिंग और राजनीतिक एजेंडा
गृह मंत्री ने संकेत दिया कि और जैसे राज्यों में चुनाव नजदीक होने के कारण विपक्ष इस मुद्दे को उछाल रहा है।
उनके अनुसार, यह पूरी तरह से चुनावी एजेंडा है, जिसका उद्देश्य असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना है।
जाति जनगणना पर भी बड़ा फैसला
के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जाति जनगणना कराने का निर्णय लिया है। गृह मंत्री ने बताया:
- पहले चरण में मकानों और भवनों की गणना
- दूसरे चरण में जातिगत आंकड़ों का संग्रह
उन्होंने कहा कि इस विषय में भी विपक्ष द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि सरकार पूरी स्पष्टता और पारदर्शिता के साथ काम कर रही है।
