नई दिल्ली, 16. April. 2026 :संसद के भीतर चल रही रणनीतिक राजनीति में एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार ने ऐसा दांव चला है, जिसने विपक्षी INDIA गठबंधन की रणनीति को पूरी तरह उलझा दिया है। महिला आरक्षण बिल को लेकर जहां विपक्ष समर्थन और विरोध की दोहरी रणनीति पर काम कर रहा था, वहीं सरकार ने ‘रूल 66’ को निलंबित करने का प्रस्ताव लाकर पूरा समीकरण ही बदल दिया है।
क्या है ‘रूल 66’ और क्यों है इतना अहम?
संसदीय प्रक्रिया की किताब ‘रूल्स ऑफ प्रोसीजर एंड कंडक्ट ऑफ बिजनेस’ का नियम 66 एक तकनीकी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण प्रावधान है। यह नियम उन परिस्थितियों में लागू होता है, जब एक विधेयक पूरी तरह दूसरे विधेयक पर निर्भर होता है। यानी अगर एक बिल पास नहीं होता, तो दूसरा अपने आप अप्रासंगिक हो जाता है।
इस नियम के तहत ऐसे बिलों को अलग-अलग पेश और पारित करने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाती है, जिससे संसद में तकनीकी स्पष्टता बनी रहे। सामान्य तौर पर इसका उपयोग तब किया जाता है जब विधेयकों के बीच कोई विवाद या अड़चन की संभावना न हो।
विपक्ष की रणनीति क्या थी?
INDIA गठबंधन की योजना साफ थी महिला आरक्षण बिल का समर्थन करके जनता के बीच सकारात्मक संदेश देना, लेकिन उससे जुड़े परिसीमन (Delimitation) बिल का विरोध करना।
विपक्ष को भरोसा था कि अलग-अलग बिलों पर अलग-अलग वोटिंग होगी, जिससे वे महिला आरक्षण के पक्ष में ‘हां’ और परिसीमन के खिलाफ ‘ना’ वोट डालकर सरकार की रणनीति को कमजोर कर देंगे।
सरकार का पलटवार: ‘रूल 66’ का निलंबन
सरकार ने विपक्ष की इस चाल को भांपते हुए ‘रूल 66’ को ही निलंबित करने का निर्णय लिया है। इस कदम का सीधा असर यह होगा कि अब अलग-अलग बिलों पर अलग-अलग वोटिंग की बाध्यता खत्म हो जाएगी।
यानी महिला आरक्षण, परिसीमन और यूनियन टेरिटरी से जुड़े विधेयकों को एक साथ, एक ही प्रस्ताव के तहत पेश और पारित किया जा सकेगा। यह एक तरह से सरकार का “कंबाइंड बिल स्ट्रेटेजी” है, जिसने पूरे खेल को बदल दिया है।
विपक्ष के लिए ‘आगे कुआं, पीछे खाई’ वाली स्थिति
अब विपक्ष के सामने बेहद कठिन स्थिति खड़ी हो गई है।
अगर विपक्ष ‘ना’ वोट करता है, तो वह महिला आरक्षण का भी विरोध करता हुआ दिखाई देगा।
और अगर ‘हां’ वोट करता है, तो परिसीमन बिल भी पास हो जाएगा, जिसका वह लगातार विरोध कर रहा है।
इस स्थिति में विपक्ष का हर कदम राजनीतिक रूप से जोखिम भरा हो गया है। सरकार इस मुद्दे को जनभावनाओं से जोड़कर विपक्ष को घेरने की पूरी तैयारी में है।
आज संसद में क्या होगा?
आज लोकसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल परिसीमन से जुड़ा विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक पेश करेंगे। वहीं गृहमंत्री अमित शाह यूनियन टेरिटरी से संबंधित बिल सदन में रखेंगे।
इन सभी विधेयकों को पेश करने के बाद सरकार इन्हें एक साथ पारित कराने का संयुक्त प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।
‘रूल 66’ का निलंबन केवल एक तकनीकी निर्णय नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है, जिसने संसद के भीतर शक्ति संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर दिया है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि विपक्ष इस चक्रव्यूह से निकलने के लिए कौन-सी नई रणनीति अपनाता है, या फिर सरकार का यह मास्टरस्ट्रोक उसे पूरी तरह घेर लेता है।
