बिहार की सियासत में सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण समारोह ने एक नई बहस छेड़ दी है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में BJP के कई बड़े नेताओं की अनुपस्थिति ने पार्टी के अंदर ‘लॉबी पॉलिटिक्स’ और गुटबाजी की अटकलों को तेज कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतने अहम मौके पर वरिष्ठ नेताओं का न पहुंचना महज संयोग नहीं हो सकता। इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतुलन और किसी खास वर्ग के प्रभाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इस घटनाक्रम का असर सीधे तौर पर BJP के ‘मास पिछड़ा (OBC) वोटर’ पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अगर यह संदेश जाता है कि पिछड़े वर्ग के नेताओं को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा, तो यह नाराजगी चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है।
विपक्ष ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए BJP पर सामाजिक संतुलन बिगाड़ने का आरोप लगाया है। फिलहाल पार्टी की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि BJP इस बढ़ती धारणा को कैसे संभालती है और क्या आने वाले समय में पार्टी अंदरूनी एकजुटता दिखाने में सफल हो पाती है।
