सीतामढ़ी के सांसद Devesh Chandra Thakur जी की महत्वपूर्ण पहलें पर सख्ती:
अब नहीं चलेगी मनमानी, अभिभावकों को बड़ी राहत
सीतामढ़ी: जिले के अभिभावकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। समाहरणालय सीतामढ़ी द्वारा जारी नए आदेश के तहत अब निजी विद्यालयों की मनमानी पर रोक लगा दी गई है। लंबे समय से मिल रही शिकायतों के आधार पर जिला प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता लाने का प्रयास किया गया है।
जानकारी के अनुसार, जिले में संचालित निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा था। विशेष रूप से किताबें, यूनिफॉर्म, कॉपियां और अन्य शैक्षणिक सामग्री एक ही निर्धारित दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा था। इसके अलावा प्रवेश शुल्क (Admission Fee), विकास शुल्क और अन्य अनावश्यक शुल्क वसूले जाने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही थीं।
इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए जिला पदाधिकारी Richie Pandey द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत यह आदेश जारी किया गया है। आदेश के तहत स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी विद्यालय अब छात्रों या अभिभावकों को किसी एक दुकान या विक्रेता से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा।
इसके साथ ही सभी निजी विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां पढ़ाई जाने वाली पुस्तकों और यूनिफॉर्म का पूरा विवरण, कीमत सहित, 13 अप्रैल 2026 तक विद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करें और विद्यालय परिसर में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करें। इससे अभिभावकों को सही जानकारी मिलेगी और वे अपनी सुविधा के अनुसार खरीदारी कर सकेंगे।
प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि विद्यालय बिना किसी ठोस कारण के यूनिफॉर्म में बार-बार बदलाव नहीं कर सकते। ऐसा करने से अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव पड़ता है, जिसे अब रोका जाएगा।
अभिभावकों के हित में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि बच्चे अपने बड़े भाई-बहनों की पुरानी किताबों का उपयोग कर सकते हैं। विद्यालयों को इसके लिए बच्चों को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया है, जिससे खर्च में और कमी आएगी।
इसके अलावा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विद्यालय वाहनों में फर्स्ट एड किट और अन्य सुरक्षा उपकरणों का होना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि स्कूल वाहन पीले रंग के ही हों, ताकि उनकी पहचान आसानी से हो सके।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत नामांकित आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करने का सख्त निर्देश भी दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और इससे जिले के हजारों अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शिक्षा क्षेत्र में यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
