भइया, जरा ठहर के सुनो… गांव-खेड़े के चौपाल पर बैठे बुजुर्ग लोग एक बात हमेशा कहते हैं “जंगल में टिकना है तो जानवरों की चाल पहचानो, और राजनीति समझनी है तो नेताओं की चाल।” अब बात सांप की करें तो ये भी दो किस्म के होते हैं। एक होता है अजगर चुपचाप पड़ा रहता है, जैसे दुनिया से उसका कोई लेना-देना ही नहीं। उसके ऊपर चूहे दौड़ जाएं, गिलहरी खेल जाए, कुत्ते भौंकते रहे, बच्चे पत्थर मार दें वो हिलता तक नहीं। लोग हंसते हैं, मजाक उड़ाते हैं, कहते हैं कि ये तो बेकार पड़ा है। लेकिन भइया… असली खेल तब शुरू होता है जब वो उठता है। जब अजगर जागता है ना, तो फिर वो शिकार को मौका नहीं देता न दौड़ने का, न बचने का सीधा पकड़कर पूरा का पूरा निगल जाता है।
और दूसरा होता है कोबरा-करैत… ये अलग ही मिजाज के होते हैं। ये चुप रहने वालों में नहीं, ये चेतावनी देते हैं। जरा सा छेड़ दो, या गलती से भी पैर पड़ जाए, तो फिर ये देर नहीं करते। ऐसा वार करते हैं कि आदमी को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। गांव में कहावत है“कोबरा का डसा पानी भी नहीं मांगता।”
अब भइया, यही खेल राजनीति में भी चल रहा है… और अगर आंख खोल के देखोगे, तो साफ नजर आएगा। Narendra Modi और Amit Shah को देख लो ये दोनों वर्षों तक सुनते रहते हैं कोई कुछ कहे, कोई कुछ बोले, कोई नाम रख दे, कोई आरोप लगा दे या भौकता रहे,ये तुरंत पलटकर जवाब नहीं देते। कई बार लोग समझ लेते हैं कि शायद ये दबाव में हैं, शायद ये कमजोर पड़ गए हैं… लेकिन असली राजनीति वहीं शुरू होती है जहां सबको लगता है कि अब कुछ नहीं होगा।
जब ये दोनों चाल चलते हैं ना भइया… तो पूरी की पूरी बाजी पलट जाती है। ऐसा नहीं कि सिर्फ बयान से जवाब देते हैं ये खेल को ही बदल देते हैं। कई बड़े-बड़े दिग्गज, जो खुद को राजनीति का उस्ताद समझते थे, देखते रह जाते हैं कि कब जमीन खिसक गई आसमान बदल गया । यकीन न हो तो Sharad Pawar और उद्धव ठाकरे की राजनीति के उतार-चढ़ाव देख लो जहां एक पल में पूरा समीकरण बदल गया और लोग समझ ही नहीं पाए कि खेल कैसे पलट गया।
अब दूसरी तरफ देखो भइया… Yogi Adityanath और Himanta Biswa Sarma ये इंतजार नहीं करते कि कोई बार-बार बोले। इनको छेड़ दिया, आरोप लगा दिया या सीधी चुनौती दे दी तो ये तुरंत जवाब देते हैं। ऐसा जवाब कि सामने वाला सोच में पड़ जाता है कि बोलूं या ना बोलूं। इनके बयान में सीधापन भी है और धार भी। गांव में ऐसे लोगों के लिए कहा जाता है“ये सीधे हैं, लेकिन सीधापन कमजोरी नहीं है।”
नहीं मानो तो Pawan Khera माफ करना पवन पेड़ा या उत्तरप्रदेश के नेताओं और माफियाओं से पूछ लेना की बयान और उसके बाद की प्रतिक्रिया कैसे एक-एक शब्द का जवाब उसी वजन से दिया जाता है।
इसी बीच Mallikarjun Kharge का बयान भी खूब चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने Rashtriya Swayamsevak Sangh और Bharatiya Janata Party को “जहरीले सांप” कहा। अब भइया, राजनीति में जुबान का खेल भी बड़ा होता है कोई शब्दों से वार करता है, तो कोई काम से जवाब देता है। लेकिन गांव का आदमी इतना जरूर समझता है कि जितना तीखा बोलोगे, उतनी ही जोरदार प्रतिक्रिया भी आएगी।
भइया, अब असली बात गांठ बांध लो राजनीति में जो चुप बैठा है ना, उसे कभी कमजोर मत समझो… और जो जोर-जोर से गरज रहा है, ये भी मत मानो कि वो खाली है। यहां हर खिलाड़ी अपने-अपने टाइम का इंतजार करता है। कोई अजगर बनके चुपचाप पड़ा रहता है, सही मौके का इंतजार करता है… और जब उठता है तो खेल ही खत्म कर देता है। तो कोई कोबरा बनके रहता है जरा सा मौका मिला नहीं कि सीधा वार कर देता है, बिना देर किए।
गांव में तो एक सीधी सी सीख है भइया राजनीति भी खेत जैसी होती है। यहां बीज भी सोच-समझ के बोया जाता है, और फसल भी समय आने पर ही काटी जाती है। जल्दीबाजी में ना खेत चलता है, ना राजनीति। इसलिए जो दिख रहा है, वही पूरा सच नहीं होता असली खेल तो अंदर ही अंदर पक रहा होता है।
तो अगर ये बात दिल में उतर गई हो ना भइया, तो इसे आगे जरूर बढ़ाना… क्योंकि ये कोई किताब की पढ़ाई नहीं है, ये तो गांव की आंखों देखी समझ है, जिंदगी से सीखी हुई बात है।
