नई दिल्ली, 08. March. 2026 | भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने देश की राष्ट्रपति के सम्मान और संवैधानिक प्रोटोकॉल की अवहेलना की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के साथ जिस प्रकार का व्यवहार पश्चिम बंगाल में किया गया, वह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राष्ट्रपति संथाली फिल्म फेस्टिवल में भाग लेने के लिए सिलीगुड़ी गई थीं। लेकिन जब वह बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचीं तो राज्य सरकार की ओर से प्रोटोकॉल के अनुसार न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और न ही राज्य का कोई मंत्री उनके स्वागत के लिए उपस्थित था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन है बल्कि राष्ट्रपति पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाने वाला व्यवहार है।
उन्होंने आगे कहा कि संथाली फिल्म फेस्टिवल के आयोजन को लेकर भी राज्य सरकार का रवैया बेहद असंवेदनशील रहा। पहले इस कार्यक्रम को एक बड़े मैदान में आयोजित किया जाना तय हुआ था, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल होने वाले थे। लेकिन अंतिम समय में राज्य सरकार ने कार्यक्रम को रद्द कर एक छोटे से हॉल में स्थानांतरित कर दिया। इसके बावजूद राष्ट्रपति उस मैदान में भी पहुंचीं, जहां हजारों की संख्या में संथाली और आदिवासी समुदाय के लोग फिल्म फेस्टिवल देखने के लिए एकत्र हुए थे।
बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि उस दौरान राज्य की पुलिस द्वारा वहां मौजूद लोगों को हटाने और तितर-बितर करने की कोशिश की जा रही थी, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति आदिवासी समाज से आती हैं और उनके सम्मान में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे, लेकिन राज्य सरकार की व्यवस्था और रवैये ने उन्हें निराश किया।
रविशंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी को अपनी “छोटी बहन” बताया, लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से जिस प्रकार की टिप्पणी सामने आई, वह अत्यंत आपत्तिजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने यह कहकर राष्ट्रपति के पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई कि “वह बार-बार वहां आ जाती हैं, ऐसा थोड़े ही होता है।” प्रसाद ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी न केवल असंवेदनशील है बल्कि देश के सर्वोच्च पद का अपमान भी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान का भाव खो चुकी है। उनके अनुसार राज्य में लगातार न्यायपालिका, प्रधानमंत्री, केंद्रीय एजेंसियों और मीडिया के खिलाफ बयानबाजी और टकराव का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ममता सरकार संविधान की बात तो करती है, लेकिन व्यवहार में उसकी मर्यादाओं का पालन नहीं करती।
रविशंकर प्रसाद ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, चाहे वह मतुआ समुदाय की महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामले हों या मेडिकल कॉलेज की छात्राओं के साथ हुए अपराध। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि राज्य में कानून का राज कमजोर हुआ है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार घुसपैठियों के प्रति नरम रवैया अपनाती है, जबकि आम नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। प्रसाद ने कहा कि राज्य में ऐसी स्थिति बन गई है जहां लोकतांत्रिक संस्थाओं, मीडिया और संवैधानिक पदों के प्रति सम्मान घटता जा रहा है।
अपने बयान के अंत में रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राष्ट्रपति देश की एकता और संविधान की सर्वोच्चता का प्रतीक हैं। उनके सम्मान और प्रोटोकॉल का पालन करना हर राज्य सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने ममता बनर्जी सरकार से इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने और भविष्य में संवैधानिक मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित करने की मांग की।
