इस्लामाबाद/नई दिल्ली, 16.Jan.2026 — पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि भारत द्वारा मई 2025 में चलाया गया “ऑपरेशन सिंदूर” उसके ढांचे पर किया गया अब तक का सबसे बड़ा और घातक सैन्य हमला था। यह स्वीकारोक्ति LeT के शीर्ष कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने पंजाब प्रांत के मुरीदके स्थित मरकज़-ए-तैयबा में आयोजित संगठन के 29वें दीक्षांत समारोह के दौरान अपने भाषण में की।
अब्दुल रऊफ, जिसे अमेरिका ने वैश्विक आतंकवादी घोषित कर रखा है और जो LeT प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी माना जाता है, ने अपने संबोधन में कहा, “6-7 मई को मुरीदके में जो हुआ, वह अत्यंत घातक था। मस्जिद को निशाना बनाकर ध्वस्त किया गया। यह एक बड़ा हमला था, लेकिन अल्लाह ने हमें बचा लिया।” रऊफ ने यह भी दावा किया कि हमले से पहले बच्चों को परिसर से हटा लिया गया था।
भारत का जवाबी सैन्य अभियान
ऑपरेशन सिंदूर भारत ने 6–7 मई 2025 की रात को अंजाम दिया था। यह कार्रवाई अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई, जिसमें 26 पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, यह हमला सीमा-पार से संचालित आतंकवादी नेटवर्क द्वारा अंजाम दिया गया था।भारत ने इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित नौ प्रमुख आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। इन लक्ष्यों में लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय मरकज़-ए-तैयबा (मुरीदके) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का बहावलपुर स्थित ठिकाना शामिल था।
आतंकी नेतृत्व को भारी नुकसान
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि इन हमलों में LeT और JeM के कई शीर्ष कमांडर मारे गए। इनमें मुरीदके के प्रमुख मुदस्सर खडियान खास (उर्फ अबू जंदाल) जैसे वरिष्ठ आतंकी शामिल थे। सुरक्षा प्रतिष्ठान के अनुसार, इन ठिकानों को लंबे समय से प्रशिक्षण, फंडिंग और वैचारिक संचालन के केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल
अब्दुल रऊफ वही व्यक्ति है जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए आतंकियों के जनाज़े की अगुवाई की थी। उस अंतिम संस्कार में पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी सामने आई थी, जिसे भारत ने आतंकवाद के साथ पाकिस्तान की सांठगांठ का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस घटनाक्रम को पाकिस्तान की “दोहरी नीति” के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
रणनीतिक और कूटनीतिक निहितार्थ
विश्लेषकों के अनुसार, LeT कमांडर की यह सार्वजनिक स्वीकारोक्ति भारत के उस दावे को बल देती है कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क की संगठनात्मक और मनोवैज्ञानिक रीढ़ को झकझोर दिया। यही कारण है कि हमले के बाद तत्कालीन पाकिस्तानी नेतृत्व की प्रतिक्रिया असहज और आक्रामक दिखाई दी।अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह स्वीकारोक्ति न केवल भारत की सैन्य क्षमताओं का संकेत है, बल्कि यह भी रेखांकित करती है कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद अब भी राज्य और गैर-राज्य तत्वों के जटिल गठजोड़ से संचालित हो रहा है एक ऐसा मुद्दा जो क्षेत्रीय शांति और वैश्विक सुरक्षा के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है।
