
संघ शताब्दी पर RSS का नया अवतार, BJP संबंधों में बदलाव के संकेत
नई दिल्ली, 29 दिसंबर 2025 | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने 100वें स्थापना वर्ष की ओर बढ़ते हुए संगठनात्मक ढांचे और कार्यशैली में अहम बदलावों की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, संघ के भीतर व्यापक स्तर पर आत्ममंथन चल रहा है, जिसका उद्देश्य संगठन को वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रभावी और लचीला बनाना है। प्रस्तावित बदलावों का असर संघ की आंतरिक संरचना के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ उसके समन्वय के स्वरूप पर भी पड़ सकता है।
संगठनात्मक ढांचे में पुनर्गठन की तैयारी
जानकारी के मुताबिक, RSS मौजूदा प्रांत-आधारित व्यवस्था में बदलाव कर संभाग स्तर की नई संरचना को मजबूत करने पर विचार कर रहा है। इससे निर्णय प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करने, स्थानीय मुद्दों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने और स्वयंसेवकों की भूमिका को अधिक सक्रिय बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। संघ से जुड़े जानकार मानते हैं कि यह कदम जमीनी स्तर पर संगठन की पहुंच को और सशक्त करेगा।
BJP के साथ समन्वय का नया मॉडल
RSS और BJP के बीच संबंध लंबे समय से भारतीय राजनीति का महत्वपूर्ण पहलू रहे हैं। शताब्दी वर्ष के मद्देनज़र संघ अब इस समन्वय को अधिक संरचित और व्यावहारिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सूत्रों का कहना है कि भविष्य में केवल शीर्ष नेतृत्व ही नहीं, बल्कि मध्य और जमीनी स्तर पर भी संवाद और विचार-विमर्श की व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है, जिससे संगठनात्मक तालमेल अधिक प्रभावी हो।
स्वतंत्र पहचान पर जोर
संघ नेतृत्व समय-समय पर यह स्पष्ट करता रहा है कि RSS को केवल राजनीतिक संदर्भ में देखना सीमित दृष्टिकोण है। संघ प्रमुख मोहन भागवत पहले भी कह चुके हैं कि संघ का मुख्य उद्देश्य समाज निर्माण, राष्ट्रसेवा और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना है। प्रस्तावित बदलावों को इसी सोच के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, ताकि संघ की सामाजिक और वैचारिक भूमिका को और स्पष्ट किया जा सके।
शताब्दी वर्ष: भविष्य की दिशा तय करने का अवसर
विशेषज्ञों के अनुसार RSS का 100वां वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि संगठन के लिए रणनीतिक पुनर्संरचना और दीर्घकालिक दिशा तय करने का अवसर है। आने वाले महीनों में इन प्रस्तावित बदलावों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है, जिससे यह तय होगा कि संघ बदलते समय के साथ खुद को किस रूप में प्रस्तुत करता है।
