नई दिल्ली, 27 मई 2026 | माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आज लोकतंत्र की स्वच्छता और निष्पक्षता को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने Election Commission of India (ECI) द्वारा चलाई जा रही Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया को पूरी तरह संवैधानिक और वैध करार दिया है।
फैसले की मुख्य बातें
जस्टिस की बेंच ने स्पष्ट किया कि Article 324 के तहत ECI को वोटर लिस्ट में मृत, डुप्लिकेट, प्रवासी और फर्जी वोटरों को हटाने का पूरा अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कोर्ट ने transparency बनाए रखने के लिए ECI के निर्देशों deletion के कारणों को प्रकाशित करना, Aadhaar सहित वैध दस्तावेज स्वीकार करना और प्रभावित व्यक्तियों को अपील का अधिकार को भी उचित ठहराया।
यह फैसला मुख्य रूप से बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आया है।
विपक्ष की दलीलें खारिज
कांग्रेस, राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (SP) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समेत विपक्षी दलों द्वारा दायर की गई याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।
विपक्ष का आरोप था कि SIR से लाखों गरीब और अल्पसंख्यक वोटर प्रभावित होंगे, लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को बेबुनियाद माना। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विपक्ष असल में अपने पारंपरिक वोट बैंक ,जिसमें फर्जी, डेड और घुसपैठिए वोटर शामिल माने जाते हैं ,को बचाने की कोशिश कर रहा था। राहुल गांधी के “लोकतंत्र खतरे में है” वाले बयानों की असलियत अब सामने आ गई है।
ECI की सराहना
Election Commission of India ने इस फैसले का स्वागत किया है। ECI का कहना है कि SIR की प्रक्रिया पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ेगी, जिससे **एक व्यक्ति, एक वोट** का सिद्धांत सही मायनों में लागू होगा।
क्या होगा असर?
यह फैसला विशेष रूप से बिहार विधानसभा चुनाव और आने वाले अन्य राज्य चुनावों पर दूरगामी प्रभाव डालेगा। अब वोटर लिस्ट की सफाई से चुनावी मैदान और अधिक समतामूलक बन जाएगा, जिससे तुष्टीकरण की राजनीति और वोट जुगाड़ को बड़ा झटका लगेगा।
देश भर में इस फैसले का व्यापक स्वागत हो रहा है। भाजपा ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है, जबकि कांग्रेस, TMC, SP और RJD जैसे विपक्षी दलों में मायूसी छाई हुई है। राहुल गांधी और ममता बनर्जी के खेमे से अब तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह फैसला न केवल ECI की स्वायत्तता को मजबूत करता है, बल्कि भारत के लोकतंत्र को और अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
