नई दिल्ली, 27.05.2026 : भारत ने स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक परिवहन के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित 10 कोच वाली डीजल-इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) ट्रेन को मंजूरी दे दी है। रेल मंत्रालय द्वारा मई 2026 में स्वीकृत यह परियोजना प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत, हरित ऊर्जा और आधुनिक भारतीय रेलवे के विजन को नई गति प्रदान करने वाली मानी जा रही है।
यह अत्याधुनिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन हरियाणा के जिंद से सोनीपत रेल खंड पर संचालित होगी। लगभग 90 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर चलने वाली यह ट्रेन 75 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति से दौड़ेगी। विशेष बात यह है कि यह ट्रेन पूरी तरह शून्य-उत्सर्जन तकनीक पर आधारित है, जिससे केवल जल वाष्प निकलता है। इसमें न डीजल का धुआँ होगा, न कार्बन उत्सर्जन और न ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य प्रदूषक।
भारतीय रेलवे ने इस परियोजना की शुरुआत “हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज” पहल के तहत की थी, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल परिवहन को बढ़ावा देना है। इसी पहल के अंतर्गत देशभर में 35 हाइड्रोजन ट्रेनों को चरणबद्ध तरीके से संचालित करने की योजना बनाई गई है। यह पहल भारत को जर्मनी और चीन जैसे देशों की श्रेणी में खड़ा करती है, जिन्होंने भविष्य की ऊर्जा तकनीकों को अपनाकर परिवहन क्षेत्र में नई दिशा दी है।
इस ट्रेन को पुराने डीजल डेमू रेक को आधुनिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से रेट्रोफिट करके तैयार किया गया है। इसका निर्माण एवं तकनीकी रूपांतरण Integral Coach Factory (आईसीएफ), चेन्नई में किया गया, जबकि विभिन्न तकनीकी परीक्षणों को Research Designs and Standards Organisation (RDSO) तथा आईसीएफ द्वारा सफलतापूर्वक पूरा किया गया। जिंद स्टेशन पर विशेष हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सुविधा भी विकसित की गई है, जो इस परियोजना को तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत बनाती है।
इस ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसका 1,200 हॉर्सपावर क्षमता वाला शक्तिशाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम है, जो इसे विश्व की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल करता है। यह उपलब्धि केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता और रेलवे के आत्मनिर्भरता मिशन का भी प्रतीक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों में तेज गति से आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वंदे भारत ट्रेन, बुलेट ट्रेन परियोजना, 100 प्रतिशत विद्युतीकरण अभियान, आधुनिक स्टेशन विकास और अब हाइड्रोजन ट्रेन जैसी परियोजनाएँ यह दर्शाती हैं कि भारत केवल वर्तमान की जरूरतों को नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर कार्य कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय रेलवे केवल यातायात का माध्यम नहीं रहेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा का मजबूत आधार बनेगा। हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक से डीजल पर निर्भरता घटेगी, आयातित ईंधन पर खर्च कम होगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी आने से भारत के नेट-जीरो लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
यह पहल ग्रामीण और गैर-विद्युतीकृत रेल खंडों के लिए भी अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है, जहां पारंपरिक डीजल इंजनों के स्थान पर स्वच्छ और कम लागत वाली ऊर्जा आधारित रेल सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकेंगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
भारतीय रेलवे की यह नई हाइड्रोजन ट्रेन केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि नए भारत की उस सोच का प्रतीक है, जो विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहती है। आने वाले वर्षों में यह पहल भारत को वैश्विक हरित परिवहन व्यवस्था के अग्रणी देशों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
