नई दिल्ली, 19 दिसंबर — हरियाणा विधानसभा में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष के रवैये पर गंभीर और तथ्यपूर्ण बयान देते हुए उसकी कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह परंपरा के अनुरूप भले न हो, लेकिन मामला अत्यंत गंभीर है, इसलिए चर्चा की शुरुआत से पहले इसे सदन के संज्ञान में लाना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि सदन केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और रचनात्मक संवाद का केंद्र होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि एक दिन पहले ही माननीय भूपेंद्र सिंह हुड्डा का विपक्ष के नेता के रूप में सदन में औपचारिक स्वागत किया गया था। उस अवसर पर श्री हुड्डा ने अपने वक्तव्य के अंत में यह अपेक्षा भी जताई थी कि सरकार विपक्ष की आवाज को नहीं दबाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने तत्काल इस भावना का सम्मान करते हुए सहमति भी व्यक्त की थी। इस सकारात्मक और भावपूर्ण संवाद से हरियाणा की जनता के मन में सदन के रचनात्मक भविष्य को लेकर एक सुखद और आशावादी संदेश गया था।
हालांकि मुख्यमंत्री ने अफसोस जताते हुए कहा कि इस सकारात्मक माहौल को बने हुए अभी दो घंटे भी नहीं बीते थे कि विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। उन्होंने इसे विपक्ष की राजनीतिक जल्दबाजी और विरोध के लिए विरोध की मानसिकता का उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार यह कदम न केवल असंगत था, बल्कि सदन की गरिमा और जनता की अपेक्षाओं के भी विपरीत था।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अविश्वास प्रस्ताव पर हुए हस्ताक्षरों का उल्लेख करते हुए एक गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव पर विपक्ष के नेता माननीय भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हस्ताक्षर नहीं हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि या तो नेता विपक्ष को इस प्रस्ताव की जानकारी नहीं थी, या फिर जानकारी होने के बावजूद उन्होंने इसे रोकने का प्रयास नहीं किया। दोनों ही स्थितियां विपक्ष की आंतरिक असमंजस और नेतृत्व की कमजोरी को उजागर करती हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि माननीय अध्यक्ष महोदय द्वारा अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार किया गया है और सरकार लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए इस पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने दोहराया कि सरकार बहस से भागने वाली नहीं है, बल्कि तथ्यों, कार्यों और जनहित के मुद्दों के साथ सदन में जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के इस बयान से यह स्पष्ट संदेश गया कि जहां सरकार संवाद और विकास की राजनीति में विश्वास रखती है, वहीं विपक्ष बार-बार गैर-जरूरी टकराव और राजनीतिक भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रहा है।
