भारतीय रेलवे ने कवच 4.0 के विस्तार में रचा इतिहास, एक दिन में 472 किमी मार्ग पर शुरू हुई स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली
नई दिल्ली | 31 जनवरी 2026 | रेल सुरक्षा को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में भारतीय रेलवे ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रेलवे ने एक ही दिन में तीन प्रमुख खंडों में कुल 472.3 रूट किलोमीटर पर कवच वर्ज़न 4.0 (स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली) को सफलतापूर्वक कमीशन कर दिया है। यह अब तक एक दिन और एक माह में कवच प्रणाली की सबसे बड़ी कमीशनिंग मानी जा रही है, जिसने रेल सुरक्षा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
इस नवीनतम विस्तार के अंतर्गत पश्चिम रेलवे के वडोदरा–विरार खंड (344 किमी), उत्तर रेलवे के तुगलकाबाद जंक्शन केबिन–पलवल खंड (35 किमी) और पूर्व मध्य रेलवे के मानपुर–सरमतनार खंड (93.3 किमी) पर कवच 4.0 की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही, भारतीय रेलवे उच्च-घनत्व और अत्यधिक व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेन परिचालन की सुरक्षा, विश्वसनीयता और दक्षता को मजबूत करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
एक दिन में सबसे बड़ी कमीशनिंग, पांच ज़ोन में कवच 4.0 सक्रिय
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह उपलब्धि कवच प्रणाली के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कमीशनिंग है। इससे पहले यह रिकॉर्ड पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा–मथुरा खंड पर 324 रूट किलोमीटर के साथ दर्ज किया गया था। नवीनतम विस्तार के साथ कवच वर्ज़न 4.0 अब भारतीय रेलवे के पांच ज़ोन में लागू हो चुका है और कुल कवरेज 1,306.3 रूट किलोमीटर तक पहुँच गया है।
इससे पहले कवच 4.0 को दिल्ली-मुंबई मार्ग के पलवल-मथुरा-नागदा खंड (633 किमी), दिल्ली-हावड़ा मार्ग के हावड़ा-बर्धमान खंड (105 किमी) तथा गुजरात के पहले बाजवा (वडोदरा)-अहमदाबाद खंड (96 किमी) पर सफलतापूर्वक चालू किया जा चुका था।
उत्तर रेलवे: दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर पर बड़ा सुरक्षा उन्नयन
उत्तर रेलवे के तहत दिल्ली-मुंबई मार्ग की चार लाइनों वाले तुगलकाबाद जंक्शन केबिन-पलवल खंड पर कवच 4.0 का चालू होना एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपलब्धि है। यह खंड भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त और उच्च-घनत्व वाले गलियारों में शामिल है, जहाँ उपनगरीय, लंबी दूरी और मालगाड़ियों का भारी आवागमन होता है। पूरे कॉरिडोर में कवच की तैनाती से परिचालन सुरक्षा, सिग्नल अनुपालन और यात्री विश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
पूर्व मध्य रेलवे: कवच के साथ पहली ट्रेन का सफल संचालन
पूर्व मध्य रेलवे के मानपुर-सरमतनार खंड पर कवच 4.0 के साथ पहली ट्रेन सेवा का सफल संचालन किया गया। ट्रेन संख्या 13305 सासाराम इंटरसिटी एक्सप्रेस इस खंड पर कवच-सुसज्जित पहली ट्रेन बनी। परीक्षण के दौरान आमने-सामने की टक्कर की स्थिति का सिमुलेशन किया गया, जिसमें सिस्टम ने स्वतः ट्रेन को रोक दिया, जिससे कवच 4.0 की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता सिद्ध हुई।
यह खंड दिल्ली–हावड़ा ट्रंक रूट का अहम हिस्सा है, जो उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से होकर गुजरता है। यहाँ वर्तमान में 130 किमी प्रति घंटे की गति की अनुमति है, जिसे ‘मिशन रफ्तार’ के तहत 160 किमी प्रति घंटे तक बढ़ाने की दिशा में कार्य प्रगति पर है।
पश्चिम रेलवे: मुंबई से चलने वाली पहली कवच-सुसज्जित ट्रेन
पश्चिम रेलवे के वडोदरा-सूरत-विरार खंड पर 344 किमी लंबे मार्ग पर कवच 4.0 का चालू होना भी ऐतिहासिक रहा। यह उपलब्धि ट्रेन संख्या 20907 दादर-भुज सयाजीनगरी एक्सप्रेस के साथ हासिल की गई, जो मुंबई से चलने वाली पहली कवच-सुसज्जित ट्रेन बन गई। इस खंड पर कार्य जनवरी 2023 में शुरू हुआ था और इसे जनवरी 2026 में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।
रेलवे के अनुसार, वडोदरा-नागदा खंड को मार्च 2026 तक और विरार-मुंबई सेंट्रल खंड को सितंबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य है। साथ ही, पश्चिम रेलवे के अब तक 364 इंजनों को कवच प्रणाली से लैस किया जा चुका है।
कवच 4.0: स्वदेशी तकनीक से सुरक्षित रेल भविष्य
कवच वर्ज़न 4.0 भारत की स्वदेशी रूप से विकसित सबसे उन्नत स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) द्वारा अनुमोदित किया गया है। यह माइक्रोप्रोसेसर, जीपीएस और रेडियो संचार तकनीक का उपयोग कर सिग्नल उल्लंघन, ओवरस्पीडिंग और संभावित टक्करों को रोकने में सक्षम है।
यह प्रणाली SIL-4 जैसे वैश्विक उच्चतम सुरक्षा मानकों का पालन करती है और कम दृश्यता या खराब मौसम में भी सुरक्षित ट्रेन संचालन सुनिश्चित करती है। स्वदेशी और लागत प्रभावी होने के कारण, कवच भारतीय रेलवे को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ घरेलू सिग्नलिंग उद्योग को भी बढ़ावा दे रहा है।
सुरक्षित, स्मार्ट और आत्मनिर्भर रेलवे की ओर कदम
भारतीय रेलवे द्वारा कवच 4.0 का तेज़ी से विस्तार यह दर्शाता है कि यात्री सुरक्षा और परिचालन विश्वसनीयता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। यह नवीनतम कमीशनिंग एक अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और आत्मनिर्भर भारतीय रेलवे की दिशा में एक और मजबूत कदम मानी जा रही है, जिससे आने वाले वर्षों में रेल यात्रा और भी सुरक्षित एवं भरोसेमंद होगी।
