पूर्वोत्तर आर्थिक गलियारे के तहत संपर्क परियोजनाओं को मिली रफ्तार, ₹6,044 करोड़ से अधिक की 48 परियोजनाएं स्वीकृत
नई दिल्ली | 31 जनवरी 2026
पूर्वोत्तर भारत के समग्र और संतुलित विकास को गति देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा पूर्वोत्तर आर्थिक गलियारे (NEEC) के अंतर्गत संपर्क और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर विशेष फोकस किया जा रहा है। दिसंबर 2024 में अगरतला में आयोजित उत्तर पूर्वी परिषद (NEC) की 72वीं पूर्ण बैठक में बनी सहमति के बाद पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने आठ उच्च-स्तरीय कार्य बलों (HLTF) का गठन किया, जिनका नेतृत्व पूर्वोत्तर के अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री कर रहे हैं।
पूर्वोत्तर आर्थिक गलियारे पर गठित उच्च-स्तरीय कार्य बल की अध्यक्षता मिजोरम के मुख्यमंत्री कर रहे हैं, जबकि इसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री के साथ-साथ असम, मेघालय और मणिपुर के मुख्यमंत्री सदस्य के रूप में शामिल हैं। इस कार्य बल का प्रमुख जनादेश पूर्वोत्तर क्षेत्र में मौजूदा आर्थिक बुनियादी ढांचे और निवेश पारिस्थितिकी तंत्र का आकलन करना, विकास में मौजूद कमियों की पहचान करना तथा निवेश आकर्षित करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियां तैयार करना है। अब तक इस कार्य बल की तीन बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
पीएम-डिवाइन योजना से पूर्वोत्तर के समग्र विकास को बल
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम-डिवाइन योजना का व्यापक उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र का तेज और समग्र विकास सुनिश्चित करना है। इसके तहत बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, साथ ही क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप सामाजिक विकास परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, युवाओं और महिलाओं के लिए आजीविका के अवसर सृजित करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में विकासात्मक कमियों को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इन उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए, योजना की शुरुआत से लेकर 21 जनवरी 2026 तक कुल 48 परियोजनाओं के लिए ₹6,044.36 करोड़ की स्वीकृति दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं के माध्यम से सड़क, संपर्क, सामाजिक बुनियादी ढांचा और आर्थिक गतिविधियों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से और अधिक जोड़ा जा सकेगा।
राज्य सरकारों की भूमिका और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं का क्रियान्वयन संबंधित राज्य सरकारों की कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा किया जाता है। परियोजनाओं की प्राथमिक निगरानी की जिम्मेदारी भी राज्य सरकारों और उनकी प्रशासनिक मशीनरी की होती है। इसके साथ-साथ मंत्रालय द्वारा क्षेत्रीय तकनीकी सहायता इकाइयों, परियोजना गुणवत्ता निगरानी तंत्र और थर्ड-पार्टी तकनीकी निरीक्षण एजेंसियों के माध्यम से भी निगरानी की जाती है।
इन सभी एजेंसियों की निरीक्षण रिपोर्ट पूर्वोत्तर विकास सेतु (PVS) पोर्टल पर अपलोड की जाती हैं, जिससे परियोजनाओं की डिजिटल और रियल-टाइम निगरानी संभव हो पाती है। इसके अतिरिक्त, फील्ड तकनीकी सहायता इकाइयां (FTSU) राज्य प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर रुकावटों को दूर करती हैं और पीएम गति शक्ति पोर्टल पर परियोजनाओं की प्रगति को नियमित रूप से अपडेट करती हैं।
राज्यसभा में सरकार की आधिकारिक जानकारी
पूर्वोत्तर आर्थिक गलियारे और पीएम-डिवाइन से जुड़ी इन परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी डॉ. सुकांत मजूमदार, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर राज्यों के विकास को लेकर प्रतिबद्ध है और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तकनीक, निगरानी और प्रशासनिक समन्वय तीनों स्तरों पर लगातार काम किया जा रहा है।
