New Delhi/ Guwahati, 19.Jan.2026: असम के कलियाबोर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ₹6,950 करोड़ से अधिक की लागत वाली काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना का भूमि पूजन कर पूर्वोत्तर भारत को एक बड़ी विकास सौगात दी। एनएच-715 के कलियाबोर–नुमालीगढ़ खंड को चार लेन में विकसित करने वाली यह परियोजना कनेक्टिविटी, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय विकास का संतुलित उदाहरण बनेगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने असम की जनता का आभार जताया और काजीरंगा की अपनी पिछली यात्राओं को याद किया। उन्होंने कहा कि काजीरंगा में बिताए गए क्षण उनके जीवन के सबसे विशेष अनुभवों में रहे हैं चाहे राष्ट्रीय उद्यान में रात्रि प्रवास हो या हाथी सफारी के दौरान प्रकृति को करीब से महसूस करना। उन्होंने इसे “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र की सशक्त झलक बताया।
प्रधानमंत्री ने कलियाबोर के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह न केवल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का प्रवेश द्वार है, बल्कि ऊपरी असम की कनेक्टिविटी का केंद्र भी है। उन्होंने महान योद्धा लचित बोरफुकन का स्मरण करते हुए कहा कि यही भूमि असम के गौरव, एकता और आत्मविश्वास की साक्षी रही है और आज यह क्षेत्र विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता 35 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर है, जिससे बाढ़ के समय गैंडे, हाथी और बाघ जैसे वन्यजीव बिना बाधा राष्ट्रीय राजमार्ग पार कर सकेंगे। वाहन ऊपर से गुजरेंगे और नीचे वन्यजीवों की पारंपरिक आवाजाही सुरक्षित रहेगी। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष, दुर्घटनाओं और यातायात बाधाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।
प्रधानमंत्री ने बताया कि यह 86 किलोमीटर लंबी पर्यावरण-संवेदनशील परियोजना नागांव, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट जिलों से होकर गुजरेगी तथा डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया सहित पूरे ऊपरी असम की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। जाखलाबंधा और बोकाखाट में बाईपास से शहरी यातायात का दबाव घटेगा और स्थानीय जीवन-गुणवत्ता में सुधार होगा।
वन्यजीव संरक्षण पर सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय गैंडे के अवैध शिकार की गंभीर समस्या थी, लेकिन सख्त निगरानी, आधुनिक संसाधनों और ‘वन दुर्गा’ जैसी पहलों के चलते 2025 में शिकार की एक भी घटना सामने नहीं आई। उन्होंने इसे राजनीतिक इच्छाशक्ति और असम की जनता के सहयोग का परिणाम बताया।
रेल कनेक्टिविटी के मोर्चे पर भी बड़ी घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस और वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा कि इससे असम का व्यापार, शिक्षा और रोजगार के अवसरों से सीधा जुड़ाव बढ़ेगा और उत्तर-पूर्व “दिल्ली के और करीब” आएगा।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने परियोजना को पर्यावरण-अनुकूल सतत विकास का ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सहित कई गणमान्य अतिथियों ने इसे राज्य के भविष्य के लिए निर्णायक बताया।काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर आज उस भारत की तस्वीर पेश करता है, जहां अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी साथ-साथ आगे बढ़ती हैं और जहां विकास, विरासत और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक बनते हैं।
