नई दिल्ली, 07 jan 2026। भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने देश के कॉम्बैट स्पोर्ट्स को नई वैज्ञानिक दिशा देने की पहल करते हुए नई दिल्ली स्थित अपने खेल विज्ञान प्रभाग में कोचों के लिए चार दिवसीय विशेष खेल विज्ञान कार्यशाला का शुभारंभ किया है। इस कार्यशाला में मुक्केबाजी, कुश्ती और जूडो जैसे प्रमुख युद्धक खेलों से जुड़े साई के कोच भाग ले रहे हैं।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य दैनिक प्रशिक्षण प्रक्रियाओं में खेल विज्ञान के प्रभावी एकीकरण को मज़बूत करना है, ताकि भारतीय एथलीटों के प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। कार्यक्रम को पूरी तरह व्यावहारिक और गहन स्वरूप में तैयार किया गया है, जिसमें कोचों को आधुनिक वैज्ञानिक सिद्धांतों के साथ प्रशिक्षण पद्धतियों को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कार्यशाला में कॉम्बैट स्पोर्ट्स के लिए तैयार किए गए विशेष स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग मॉडल पर फोकस किया गया है। कोचों को फंक्शनल स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, प्लायोमेट्रिक्स, पीरियोडाइज्ड रेजिस्टेंस ट्रेनिंग और खेल प्रदर्शन से जुड़ी व्यायाम शरीर-विज्ञान की मूल अवधारणाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे एथलीटों की ताकत, गति और सहनशक्ति को सुरक्षित तरीके से बढ़ा सकें।
बिभु कल्याण नायक, ब्रिगेडियर (डॉ.) एवं निदेशक–प्रमुख, खेल विज्ञान प्रभाग, SAI ने कहा कि माननीय केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और खेल सचिव लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि कोच खेल विज्ञान को अपनी रोज़मर्रा की कोचिंग में अपनाएं। उन्होंने कहा, “खेल वैज्ञानिकों के साथ कोचों का ऐसा केंद्रित जुड़ाव भारत की पदक संभावनाओं को मज़बूती देगा। हमारा विज़न एथलीट-केंद्रित, कोच-नेतृत्व वाला और खेल विज्ञान से समर्थित है।”
कार्यशाला के दौरान कॉम्बैट स्पोर्ट्स में आम चोटों, विशेषकर कंधे से जुड़ी समस्याओं की रोकथाम और प्रबंधन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसके लिए साक्ष्य-आधारित वार्म-अप प्रोटोकॉल, स्ट्रेंथ और स्टेबिलिटी ट्रेनिंग तथा वैज्ञानिक लोड-मैनेजमेंट रणनीतियों को समझाया गया। साथ ही खेल पोषण, रिकवरी साइंस, डोपिंग रोधी जागरूकता और व्यावहारिक खेल मनोविज्ञान पर आधारित मॉड्यूल भी शामिल किए गए हैं, जो एथलीटों के दीर्घकालिक करियर को ध्यान में रखते हैं।
उद्घाटन सत्र को वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के खेल चोट केंद्र (SIC) के निदेशक दीपक जोशी ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यदि खेल विज्ञान, खेल चिकित्सा और चोट प्रबंधन का समन्वित रूप से उपयोग किया जाए, तो यह किसी भी एथलीट के करियर की दिशा को पूरी तरह बदल सकता है।
उन्होंने इसे भारत के खेल इकोसिस्टम के लिए “एक बड़ी उपलब्धि” बताते हुए कहा कि SAI द्वारा संदर्भित एथलीटों को प्राथमिकता के आधार पर उपचार, निरंतर चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित ‘रिटर्न-टू-प्ले’ का स्पष्ट मार्ग मिलेगा। इसी कड़ी में SAI और सफदरजंग अस्पताल स्थित SIC के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर की तैयारी भी चल रही है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जहां SIC उन्नत खेल चिकित्सा और सर्जिकल उपचार संभालेगा, वहीं SAI खेल विज्ञान आधारित पुनर्वास और प्रतिस्पर्धा में सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया का प्रबंधन करेगा। यह पहल भारतीय एथलीटों को न केवल चोट से उबरने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें लंबे समय तक उच्च स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए भी सक्षम बनाएगी।
