News (समाचार):
नई दिल्ली।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदर्शी सोच ने देश को ऐसा सड़क नेटवर्क दिया, जिसने विकास की गति तेज़ कर दी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी योजनाएँ न केवल काग़ज़ से निकलकर ज़मीन पर उतरीं, बल्कि गाँव–शहर की दूरियाँ भी घटाईं।
लेकिन उसी दौर की एक और ऐतिहासिक परिकल्पना — ‘नदी जोड़ो योजना’ — आज भी अपने साकार होने की प्रतीक्षा कर रही है।
अटल जी ने समय रहते देश के जल संकट को पहचाना था। बाढ़ से तबाह क्षेत्रों और सूखे से जूझते इलाकों के बीच जल संतुलन बनाने की उनकी कल्पना दूरगामी थी। योजना बनी, चर्चाएँ हुईं, रिपोर्टें तैयार हुईं, पर राज्यों के बीच सहमति, पर्यावरणीय चिंताएँ और वित्तीय चुनौतियाँ इसे आगे बढ़ाने में बाधा बनती रहीं।
आज जलवायु परिवर्तन के दौर में जब हर साल बाढ़ और सूखा साथ-साथ देश को चुनौती दे रहे हैं, तब ‘नदी जोड़ो’ की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। सड़कें विकास का रास्ता दिखाती हैं, पर नदियाँ जीवन का आधार हैं। अटल जी की विरासत हमसे यह प्रश्न करती है—क्या हम उनकी सड़कों पर चलकर संतुष्ट रहेंगे, या उनकी नदियों को जोड़कर भविष्य भी सुरक्षित करेंगे?
