अयोध्या/नई दिल्ली , 07 जुलाई 2026 :- रामलला के मंदिर निर्माण की नींव रखने वाले योद्धाओं में से एक, विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर ट्रस्ट की बैठक में ऐसा सनसनीखेज हंगामा हुआ कि पूरा हिंदू समाज स्तब्ध है। कल हुई बैठक में इस्तीफे के मुद्दे पर इतनी तीखी बहस छिड़ी कि माहौल भावुकता और आक्रोश से भर गया। सूत्रों के अनुसार अधिकांश ट्रस्टी चंपत राय के तथाकथित इस्तीफे के घोर विरोधी रहे।
शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने सबसे आक्रामक विरोध किया और साफ कहा कि चंपत राय जैसे समर्पित कार्यकर्ता को इस तरह अलग नहीं किया जा सकता। स्वामी परमानंद दिनेंद्र दास जी ने खुलकर घोषणा की- “चंपत राय बिल्कुल निर्दोष हैं। उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं होना चाहिए। वे राम भक्ति के प्रतीक हैं।”
ट्रस्ट के खजांची गोविंद देव गिरी महाराज तो प्रस्ताव पढ़ते समय इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों से आंसू बह निकले। बैठक में उपस्थित कई संत-महात्माओं ने चंपत राय को ट्रस्ट की आत्मा और राम मंदिर आंदोलन का अटूट स्तंभ बताया। जब बहस अपने चरम पर पहुंच गई तो के.पारासरण जी को बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने शांति स्थापित करते हुए ट्रस्ट के नियमों की याद दिलाई कि कोई भी ट्रस्टी इस्तीफा दे दे तो स्वतः ही स्वीकृत माना जा सकता। एक महीने की अनिवार्य नोटिस का प्रावधान है, जिसकी पूरी तरह अनदेखी की गई।
चौंकाने वाले खुलासे: सब कुछ संदिग्ध, किसी षड़यंत्र का हिस्सा तो नहीं !!
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों ने जो जानकारी दी है, वह पूरे प्रकरण को और संदिग्ध बना रही है:
– बैठक की आधिकारिक सूचना बिना किसी हस्ताक्षर के जारी की गई।
– प्रेस विज्ञप्ति भी बिना हस्ताक्षर के जारी कर दी गई।
– चंपत राय का त्यागपत्र (रिजिग्नेशन लेटर) की मूल प्रति लापता बताई जा रही है।
– पूरी प्रक्रिया बिना उचित दस्तावेजीकरण और औपचारिकता के आगे बढ़ा दी गई।
ये खुलासे चंपत राय के समर्थकों में आग की तरह फैल रहे हैं। कई ट्रस्टी और राम भक्त अब इस अवैध और अपारदर्शी प्रक्रिया को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में लग सकते हैं हैं। सूत्रों का कहना है कि चंपत राय से जुड़े लोग और जो उन्हें निर्दोष मानते हैं, वे जल्द ही कानूनी कदम उठा सकते हैं।
चंपत राय कौन हैं? राम मंदिर आंदोलन के सिपाही:-
चंपत राय अपने सहयोगियों, मित्रों एवं साधु संतो के साथ राम मंदिर आंदोलन की पहली पंक्ति में खड़े रहे हैं। 1990 के आंदोलन से लेकर 2019 के सुप्रीम कोर्ट फैसले तक, हर मोर्चे पर उनकी उपस्थिति रही। विश्व हिंदू परिषद के महासचिव के रूप में उन्होंने देश भर में राम भक्ति की लहर पैदा की। ट्रस्ट के महासचिव बनने के बाद उन्होंने मंदिर निर्माण, चंदा संग्रह, पारदर्शिता और भक्तों की भावनाओं को सम्मान देने का कार्य बखूबी किया।
संतों का मानना है कि अगर कहीं किसी कर्मचारी स्तर पर कोई गलती हुई भी है तो उसे पूरे ट्रस्ट या चंपत राय जैसे निष्ठावान राम भक्त के सिर पर नहीं मढ़ा जा सकता। “ कुछ स्वार्थी और लालची लोगों के कथित कुकृत्य कभी भी करोड़ों सनातनियों की अटूट श्रद्धा, विश्वास और भक्ति को डिगा नहीं सकते। श्रीराम जन्मभूमि केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों की आस्था, तप, त्याग और सदियों के संघर्ष का दिव्य प्रतीक है। अयोध्या धाम की रक्षा स्वयं प्रभु श्रीराम की कृपा और उनके परम भक्त संकटमोचन श्रीहनुमान के आशीर्वाद से होती आई है और आगे भी होती रहेगी। यदि किसी व्यक्ति ने अपने निजी स्वार्थ के लिए भक्तों की भावना या दान की पवित्रता को ठेस पहुंचाई है, तो उसका न्याय कानून अपनी प्रक्रिया के अनुसार करेगा; किंतु संत समाज का कहना है कि आस्था के साथ छल का उत्तर केवल सांसारिक दंड तक सीमित नहीं होता। प्रभु श्रीराम करुणा के सागर हैं, वे क्षमा कर दें तो भी यह विश्वास है कि धर्म और सत्य के प्रहरी पवनपुत्र श्रीहनुमान के न्याय से कोई बच नहीं सकता। अंततः सत्य की ही विजय होगी, धर्म की ही प्रतिष्ठा होगी और श्रीराम के चरणों में करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति पहले से भी अधिक दृढ़ होकर जगमगाती रहेगी ” कई संतों ने बैठक में कहा।

जनता के मन में चंपत राय के लिए ये सवाल:-
पूरे विश्व के राम भक्त इस पूरे मामले पर चंपत राय से कुछ बड़े सवालों के जवाब जानने को बेताब हैं। ये सवाल न सिर्फ व्यक्तिगत हैं, बल्कि ट्रस्ट की पारदर्शिता और भविष्य से भी जुड़े हैं:
1. चंदा चोरी या अनियमितताओं के बारे में आपको कब और कितनी जानकारी थी? क्या आपने इसे रोकने के लिए कोई कदम उठाए?
2. क्या आपके सबसे विश्वसनीय सहयोगियों ने आपको धोखा दिया? अगर हां, तो कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं?
3. अगर आपको सब कुछ पता था तो क्या आप अंदर ही अंदर सुधार की प्रक्रिया चला रहे थे? क्या आपने किसी को चेतावनी दी या आंतरिक जांच शुरू की?
4. ट्रस्ट में रहते हुए आपने राम मंदिर निर्माण और चंदा प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए?
5. क्या आप ट्रस्ट में वापसी के लिए तैयार हैं, अगर संतों, ट्रस्टियों और करोड़ों राम भक्तों की इच्छा हो?
6. भविष्य में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को और मजबूत और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए आपका क्या सुझाव है?
7. इस पूरे प्रकरण ने आपको व्यक्तिगत रूप से कितना आहत किया है और आप राम भक्तों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
राम भक्तों का आक्रोश और समर्थन:-
सोशल मीडिया से लेकर अयोध्या की गलियों तक चंपत राय के समर्थन में आवाजें उठ रही हैं। कई संगठन और संत अब खुलकर कह रहे हैं कि चंपत राय को ट्रस्ट से अलग करना राम मंदिर आंदोलन को कमजोर करने की साजिश हो सकती है। सूत्रों के अनुसार कल के बैठक में शामिल ज्यादातर ट्रस्टियों एवं संत समाज का मानना है कि चंपत राय निर्दोष हैं और उनकी जगह कोई नहीं ले सकता।
राम भक्त अब मांग कर रहे हैं कि ट्रस्ट की सारी प्रक्रिया पारदर्शी हो, गायब दस्तावेजों की जांच हो और चंपत राय जैसे समर्पित कार्यकर्ता को न्याय मिले एवं यदि चंदे में किसी भी प्रकार की अनियमितता या गबन में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसे कानून के अनुसार कठोरतम दंड मिलना चाहिए। करोड़ों रामभक्तों की आस्था और विश्वास के साथ खिलवाड़ करने वालों को ऐसी सजा मिले कि भविष्य में कोई भी श्रीराम के नाम पर मिली श्रद्धा और दान की पवित्रता को कलंकित करने का साहस न कर सके। प्रभु श्रीराम के मंदिर से जुड़ी हर पाई भक्तों की अमानत है और उसकी रक्षा करना राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नैतिक दायित्व है।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कल की यह बैठक साबित करती है कि चंपत राय ट्रस्ट की रीढ़ हैं। साधु-संतों का तूफानी समर्थन, नियमों की अनदेखी और संदिग्ध प्रक्रिया इस बात की गवाही दे रही है कि उनका इस्तीफा न तो इच्छित था और न ही सही तरीके से स्वीकार किया गया। राम मंदिर का कार्य अब और तेज गति से, और अधिक पारदर्शिता के साथ आगे बढ़े, इसके लिए चंपत राय की वापसी या उनका मार्गदर्शन जरूरी है।
