नई दिल्ली | 5 जुलाई 2026 : केंद्र सरकार ने प्याज किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मूल्य स्थिरीकरण बफर (Price Stabilisation Buffer) के लिए प्याज की खरीद कीमत में 13 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। अब सरकार 1,875 रुपये प्रति क्विंटल के बजाय 2,125 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्याज खरीदेगी। नई खरीद दर 4 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है।
सरकार का यह निर्णय किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के साथ-साथ देश में प्याज की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। NAFED और NCCF के माध्यम से बफर स्टॉक के लिए खरीद पहले से जारी है।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
नई खरीद कीमत से विशेष रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात के लाखों प्याज उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य किसानों को बेहतर मुनाफा दिलाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी उचित कीमत पर प्याज उपलब्ध कराना है।
उत्पादन सामान्य, उपलब्धता पर्याप्त
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार वर्ष 2025-26 में देश में 307.37 लाख मीट्रिक टन प्याज उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के उत्पादन के लगभग बराबर है। इससे स्पष्ट है कि देश में प्याज की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है और किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है।
बफर स्टॉक से कीमतों पर रहेगा नियंत्रण
सरकार के अनुसार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में प्याज का पर्याप्त भंडार मौजूद है। वर्तमान में देशभर की मंडियों में प्रतिदिन 50 हजार मीट्रिक टन से अधिक प्याज की आवक हो रही है, जबकि केवल महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 30 हजार मीट्रिक टन से अधिक है।
सरकार का मानना है कि मजबूत बफर स्टॉक और पर्याप्त उपलब्धता से आगामी महीनों में भी बाजार में कीमतों को संतुलित रखने में मदद मिलेगी।
सट्टेबाजी पर सरकार की नजर
कुछ क्षेत्रों में मानसून की धीमी शुरुआत के कारण व्यापारियों द्वारा सीमित स्तर पर सट्टा आधारित खरीदारी देखी गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में मांग सामान्य बनी हुई है और प्याज की उपलब्धता पर्याप्त है। ऐसे में किसी बड़े मूल्य संकट की संभावना नहीं है।
निर्यात भी सामान्य
जून 2026 के दौरान भारत से लगभग 1.50 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात हुआ। हालांकि पाकिस्तान और चीन की नई फसल आने से कुछ समय के लिए निर्यात की गति धीमी पड़ सकती है, लेकिन घरेलू बाजार पर इसका विशेष प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।
किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ बाजार में मूल्य स्थिरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे एक ओर किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को भी आवश्यक वस्तु उचित दरों पर उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
