LokOS डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण
नई दिल्ली, 4 जुलाई 2026। ग्रामीण भारत में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन और पारदर्शी प्रशासन को नई गति देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत विकसित लोक ऑपरेटिंग सिस्टम (LokOS) को व्यापक स्तर पर लागू किया है। यह एक आधुनिक वेब और मोबाइल आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो स्वयं सहायता समूहों (SHGs), ग्राम संगठनों और क्लस्टर स्तरीय महासंघों के संपूर्ण डिजिटल प्रबंधन को संभव बना रहा है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, LokOS का उद्देश्य कागजी कार्यवाही को कम करना, वित्तीय लेनदेन को डिजिटल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना तथा ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है।
हर वर्ष 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड
LokOS प्लेटफॉर्म स्वयं सहायता समूहों के भीतर होने वाले प्रति वर्ष लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखता है। इसके माध्यम से बचत, ऋण, पुनर्भुगतान, वित्तीय सहायता और अन्य आर्थिक गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी संभव हो रही है।
इस डिजिटल व्यवस्था से न केवल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे, बल्कि कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक दक्षता भी बढ़ेगी।
LokOS की प्रमुख विशेषताएं
LokOS प्लेटफॉर्म ग्रामीण समुदायों के लिए कई आधुनिक डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराता है-
- स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन और क्लस्टर स्तरीय संघों का डिजिटल पंजीकरण एवं प्रबंधन।
- आधार और बैंक खाते से जुड़ी विशिष्ट डिजिटल पहचान।
- बचत, ऋण और पुनर्भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड।
- आजीविका संबंधी योजनाओं का डेटा प्रबंधन।
- ग्राम स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक भूमिका आधारित प्रशासन।
- रियल-टाइम डैशबोर्ड और एक क्लिक पर रिपोर्टिंग सुविधा।
- डिजिटल निगरानी और बेहतर नीति निर्माण के लिए डेटा आधारित विश्लेषण।
34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंच
LokOS आज देशभर में बड़े पैमाने पर लागू किया जा चुका है। वर्तमान में यह प्लेटफॉर्म-
- 34 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों
- 762 जिलों
- 7,241 विकासखंडों
- 2.57 लाख ग्राम पंचायतों
- 5.92 लाख गांवों
तक अपनी पहुंच बना चुका है।
10 करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूह सदस्य जुड़े
LokOS से जुड़ी संस्थाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म पर—
- 34,314 क्लस्टर स्तरीय संघ (CLF)
- 5.62 लाख ग्राम संगठन (VO)
- 94.16 लाख स्वयं सहायता समूह (SHG)
- 10.03 करोड़ SHG सदस्य
डिजिटल रूप से जुड़े हुए हैं।
हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का डिजिटल प्रबंधन
LokOS के माध्यम से विभिन्न वित्तीय सहायता योजनाओं की निगरानी भी की जा रही है। इनमें शामिल हैं-
- रिवॉल्विंग फंड (RF): 9,718.41 करोड़ रुपये
- कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (CIF): 64,607.66 करोड़ रुपये
- कम्युनिटी एंटरप्राइज फंड (CEF): 38.34 करोड़ रुपये
इससे धनराशि के उपयोग में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो रही है।
‘शी-लीप्स’ प्लेटफॉर्म से ग्रामीण महिला उद्यमिता को बढ़ावा
29 जून 2026 को LokOS के अंतर्गत SHE-LEAPS (Self Help Entrepreneur-Livelihood and Enterprise Application for Prosperity and Sustainability) प्लेटफॉर्म भी शुरू किया गया।
यह डिजिटल मंच स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को उद्यम स्थापित करने, व्यवसाय प्रबंधन, उत्पादन, विपणन और आय बढ़ाने में तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। इससे कृषि और गैर-कृषि दोनों प्रकार के ग्रामीण उद्यमों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
‘लखपति दीदी’ अभियान को मिलेगा डिजिटल आधार
LokOS सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लखपति दीदी’ पहल को भी मजबूत आधार प्रदान कर रहा है। प्लेटफॉर्म के माध्यम से:
- 6,611 मास्टर ट्रेनर्स
- 4.09 लाख कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स (CRP)
- 3.87 करोड़ संभावित लखपति दीदियों
की डिजिटल निगरानी और प्रगति का रिकॉर्ड रखा जा रहा है।
साथ ही 18.50 करोड़ डिजिटल आजीविका रजिस्टर (DAR) का रखरखाव किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण आजीविका योजनाओं की बेहतर योजना, निगरानी और मूल्यांकन संभव हो रहा है।
डिजिटल ग्रामीण भारत की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि LokOS केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण की मजबूत नींव है। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी, स्वयं सहायता समूह अधिक सशक्त होंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं प्रभावी तरीके से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, LokOS आत्मनिर्भर गांवों, वित्तीय समावेशन और महिला सशक्तिकरण के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल साबित हो रही है।
