आयुष उत्पादों को मिलेगी वैश्विक पहचान: सरकार और उद्योग ने निर्यात, गुणवत्ता और ब्रांडिंग बढ़ाने पर बनाया रोडमैप
नई दिल्ली, 3 जुलाई। भारत के पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र आयुष को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने और इसके निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग, आयुष मंत्रालय और आयुष निर्यात संवर्धन परिषद (AYUSHEXCIL) ने नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में एक महत्वपूर्ण सरकारी-उद्योग विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया। इस बैठक में सरकार, उद्योग जगत, निर्यातकों, स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) सहित 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक का मुख्य विषय था “पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं में भारत के वैश्विक नेतृत्व को सुदृढ़ बनाना: आयुष क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्ता, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय सहयोग।” चर्चा का उद्देश्य भारत के आयुष उत्पादों और सेवाओं को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना और उन्हें नई पहचान दिलाना था।
आयुष को मिलेगा वैश्विक बाजार का बड़ा अवसर
बैठक में भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से मिलने वाले अवसरों, आयुष उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग, निर्यात प्रक्रिया को आसान बनाने, गुणवत्ता मानकों, WHO-GMP अनुपालन, वैज्ञानिक प्रमाणन, चिकित्सा पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने कहा कि यदि गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए तो भारतीय आयुष उत्पादों की मांग दुनिया भर में और तेजी से बढ़ सकती है।
भारत बन सकता है समग्र स्वास्थ्य सेवा का वैश्विक केंद्र
आयुष निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष एवं सांसद डॉ. अनुराग शर्मा ने कहा कि दुनिया में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति तेजी से विश्वास बढ़ रहा है और भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व करने की पूरी क्षमता रखता है। उन्होंने वैज्ञानिक शोध, गुणवत्ता सुनिश्चित करने, नवाचार और मजबूत ब्रांडिंग के लिए सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि आयुष निर्यात संवर्धन परिषद निर्यातकों को नए बाजार उपलब्ध कराने, क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
सिर्फ निर्यात नहीं, वैश्विक ब्रांड बनाना है लक्ष्य
वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आयुष उत्पादों का निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर मजबूत भारतीय आयुष ब्रांड तैयार करना है। उन्होंने उद्योग जगत से नवाचार, मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि भारत के बढ़ते मुक्त व्यापार समझौते आयुष उद्योग के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खोल रहे हैं और इसका लाभ उठाने के लिए उद्योगों को तैयार रहना चाहिए।
गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर रहेगा विशेष जोर
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि भारतीय आयुष उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए आयुष मार्क (Ayush Mark) और आयुर्वेद आहार (Ayurveda Aahar) जैसी योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है। उन्होंने उद्योग जगत से उत्पादों की गुणवत्ता, आधुनिक पैकेजिंग, आकर्षक ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादन पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
उन्होंने बताया कि सरकार भारतीय गुणवत्ता मानकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए भी लगातार काम कर रही है, जिससे भारतीय आयुष उत्पादों को वैश्विक बाजारों में आसानी से स्वीकार्यता मिल सके।
हितधारकों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यक्रम के अंत में आयोजित खुली चर्चा में निर्यातकों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई, निर्माताओं और अन्य उद्योग प्रतिनिधियों ने बाजार तक आसान पहुंच, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, व्यापार सुगमता, नवाचार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ब्रांडिंग को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
सरकार ने कहा कि इस विचार-विमर्श से प्राप्त सुझाव भविष्य की नीतियों, निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं और ‘ब्रांड इंडिया आयुष’ को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और उद्योग मिलकर गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक ब्रांडिंग पर लगातार काम करते रहे, तो आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के पारंपरिक स्वास्थ्य क्षेत्र में अग्रणी देश के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।
