संसदीय गरिमा बनाए रखें, जनहित को दें सर्वोच्च प्राथमिकता: ओम बिरला
कोलकाता | 5 जुलाई 2026
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्यों से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने, जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और संसदीय संवाद की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “नारेबाज़ी, व्यवधान और गतिरोध से कोई नेता नहीं बनता, बल्कि तथ्य, तर्क और रचनात्मक विचार ही प्रभावी नेतृत्व की वास्तविक पहचान हैं।”
वे लोकसभा सचिवालय के पार्लियामेंटरी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज़ (PRIDE) तथा पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा आयोजित 18वीं विधानसभा के सदस्यों के दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने भी समापन उद्बोधन दिया।
लोकतांत्रिक संवाद ही विधायी कार्यप्रणाली का आधार
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधानमंडल केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि समाधान, विचार-विमर्श और जनहितकारी नीतियों के निर्माण का केंद्र है। उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि सदन की चर्चाओं को राज्य के विकास, जनसमस्याओं के समाधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती से जोड़ें।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की वास्तविक शक्ति सार्थक संवाद, परस्पर सम्मान और जनकल्याण के प्रति साझा प्रतिबद्धता में निहित है।
जनप्रतिनिधि बनें अंतिम व्यक्ति की आवाज़
ओम बिरला ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं और सुविधाओं को पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही किसी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पूंजी है और उसी विश्वास के आधार पर लोकतंत्र मजबूत होता है।
उन्होंने विधायकों से जनता की समस्याओं, अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को प्रभावी ढंग से सदन में उठाने तथा उनके समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
सीखना कभी समाप्त नहीं होता
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में अध्ययन, संवाद और सेवा प्रभावी नेतृत्व की आधारशिला हैं। उन्होंने डिजिटल और तकनीकी बदलावों के दौर में जनप्रतिनिधियों को निरंतर स्वयं को अपडेट रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि प्रबोधन कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान और अनुभव का उपयोग विधायी दायित्वों के प्रभावी निर्वहन में किया जाना चाहिए।
स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान
स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि उनका जीवन, चरित्र और विचार आज भी समाज और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि समर्पण, नैतिकता और समाज के प्रति प्रतिबद्धता से ही परिवर्तनकारी नेतृत्व विकसित होता है।
जनता का विश्वास ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सम्मान और लोकप्रियता पद से नहीं, बल्कि ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और जनसेवा से प्राप्त होती है। जनप्रतिनिधियों को सादगी, विनम्रता और जवाबदेही को अपने आचरण का हिस्सा बनाना चाहिए।
विकसित भारत@2047 में पश्चिम बंगाल की महत्वपूर्ण भूमिका
विकसित भारत@2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत का विकास उसके राज्यों के समग्र विकास पर निर्भर करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि पश्चिम बंगाल अपनी समृद्ध बौद्धिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के बल पर एक बार फिर देश को नई दिशा देने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
प्रबोधन कार्यक्रम में हुए महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र
दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विधायी कार्यप्रणाली, संसदीय परंपराएं, कार्यपालिका की जवाबदेही, समिति प्रणाली, विधायी प्रक्रिया, वित्तीय एवं बजटीय प्रणाली, संसदीय विशेषाधिकार, आचार-नीति तथा डिजिटल विधायी पहलों सहित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
