मधुबनी | न्यूज़ रिपोर्ट
Sandip University के Sijoul (मधुबनी, बिहार) कैंपस को लेकर हाल के महीनों में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल देखने को मिला, जब विश्वविद्यालय का नाम UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा जारी की गई डिफॉल्टर सूची में शामिल पाया गया।
UGC द्वारा सितंबर 2025 में जारी सूची में देश के 50 से अधिक निजी विश्वविद्यालयों को निर्धारित शैक्षणिक जानकारियाँ समय पर सार्वजनिक नहीं करने के कारण डिफॉल्टर घोषित किया गया था। इसी सूची में Sandip University, Sijoul का नाम भी शामिल था। इस खबर के सामने आने के बाद छात्रों में अपनी डिग्री, भविष्य और प्लेसमेंट को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई।
हालाँकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि डिफॉल्टर सूची में शामिल होने का अर्थ विश्वविद्यालय की मान्यता समाप्त होना नहीं था। UGC के दिशा-निर्देशों के अनुसार यह एक प्रक्रियात्मक कमी थी, न कि विश्वविद्यालय को फर्जी या अमान्य घोषित किया जाना।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बाद में आवश्यक जानकारियाँ UGC के निर्देशानुसार वेबसाइट पर अपलोड कर दी गईं और अनुपालन पूरा किया गया। विश्वविद्यालय आज भी UGC द्वारा मान्यता प्राप्त निजी राज्य विश्वविद्यालय है और इसकी डिग्रियाँ वैध मानी जाती हैं।
इसके बावजूद, छात्रों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासन की ओर से समय पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिससे भ्रम और डर की स्थिति बनी। कुछ छात्रों ने यह भी मांग की है कि विश्वविद्यालय भविष्य में पारदर्शिता बनाए रखे और किसी भी नियामक अपडेट की जानकारी छात्रों को पहले से दे।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि निजी विश्वविद्यालयों को न केवल नियमों का पालन करना चाहिए, बल्कि छात्रों के भरोसे को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में सूचना की पारदर्शिता कितनी अहम है।
