लद्दाख माउंट ख्याम त्सो मासिफ पर्वतारोहण अभियान
नई दिल्ली, 8 जुलाई। भारतीय पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया है। जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान, पहलगाम की 22 सदस्यीय टीम ने लद्दाख के रुमत्से फू क्षेत्र में स्थित ख्याम त्सो मासिफ (Khyam Tso Massif) की चार चुनौतीपूर्ण चोटियों पर सफलतापूर्वक आरोहण कर देश का गौरव बढ़ाया। इस अभियान ने न केवल भारतीय पर्वतारोहियों के साहस और कौशल का परिचय दिया, बल्कि लद्दाख की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं में भारत की मजबूत उपस्थिति भी दर्ज कराई।
इस विशेष अभियान को 26 जून 2026 को टीम लीडर कर्नल हेमचंद्र सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। अभियान में शामिल सभी सदस्यों ने ऊंचाई वाले क्षेत्र में सुरक्षित चढ़ाई के लिए निर्धारित अनुकूलन (Acclimatization) कार्यक्रम का पूरी तरह पालन किया, जिससे कठिन परिस्थितियों में भी अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया जा सका।
5901 मीटर ऊंची चोटी पर पहली सफलता
2 जुलाई 2026 को खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद टीम ने पहली बार माउंट पीक प्वाइंट (5901 मीटर) की चोटी पर सफलतापूर्वक विजय प्राप्त की। यह उपलब्धि अपने आप में ऐतिहासिक रही, क्योंकि इस चोटी पर इससे पहले कोई सफल अभियान दर्ज नहीं था।
5600 मीटर की ऊंचाई से पहली बार पैराग्लाइडिंग उड़ान
इस अभियान का सबसे रोमांचक और ऐतिहासिक क्षण तब आया, जब टीम लीडर कर्नल हेमचंद्र सिंह ने 5901 मीटर की चोटी से लगभग 5600 मीटर की ऊंचाई से पहली बार पैराग्लाइडिंग उड़ान भरकर नया इतिहास रच दिया। इतनी अधिक ऊंचाई से की गई यह उड़ान भारतीय साहसिक खेलों के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।
तीन दिनों में तीन और कठिन चोटियों पर फतह
टीम ने खराब मौसम को चुनौती देते हुए 3 जुलाई 2026 को 6090 मीटर ऊंची तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन चोटी तथा 5944 मीटर ऊंचे माउंट पीक प्वाइंट पर भी सफलतापूर्वक आरोहण किया। इन चोटियों तक पहुंचना अत्यधिक कठिन माना जाता है, लेकिन टीम के बेहतर समन्वय, प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प ने इसे संभव बना दिया।
इसके बाद 5 जुलाई 2026 को अभियान की अंतिम और महत्वपूर्ण चोटी माउंट ख्याम-III (6018 मीटर) पर भी टीम ने सफलता का परचम लहराया। सभी चोटियों पर विजय प्राप्त करने के बाद दल सुरक्षित रूप से रोड हेड कैंप लौट आया।
साहस, कौशल और टीम वर्क का शानदार उदाहरण
पूरे अभियान के दौरान पर्वतारोहियों ने कठिन मौसम, बर्फीले रास्तों, तेज हवाओं और चुनौतीपूर्ण भूभाग का सामना करते हुए असाधारण साहस, अनुशासन और टीम भावना का परिचय दिया। यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि उचित प्रशिक्षण और मजबूत नेतृत्व के बल पर सबसे कठिन चुनौतियों को भी सफलता में बदला जा सकता है।
भारत की पर्वतारोहण क्षमता को मिली नई पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफल अभियान केवल पर्वतारोहण की उपलब्धि नहीं है, बल्कि लद्दाख की अनछुई पर्वत श्रृंखलाओं में भारत की बढ़ती उपस्थिति और साहसिक खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। इससे युवाओं में एडवेंचर स्पोर्ट्स के प्रति रुचि बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पर्वतारोहण क्षमता को नई पहचान मिलेगी।
