नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित कर्पूरी ठाकुर को उनकी जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज के शोषित, वंचित और कमजोर वर्गों का उत्थान जननायक कर्पूरी ठाकुर की राजनीति के केंद्र में रहा और उनका संपूर्ण जीवन सामाजिक न्याय व जनसेवा को समर्पित रहा।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा अपने संदेश में कहा कि कर्पूरी ठाकुर अपनी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के प्रति आजीवन समर्पण के कारण सदैव स्मरणीय और अनुकरणीय रहेंगे। उन्होंने कहा कि जननायक का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची राजनीति वही है, जो अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए।
जननायक कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी 1924 को बिहार के समस्तीपुर जिले के पितौंझिया (अब कर्पूरी ग्राम) में एक साधारण परिवार में हुआ था। अत्यंत सामान्य परिवेश से निकलकर उन्होंने सामाजिक विषमताओं को करीब से देखा और जीवन भर उनके खिलाफ संघर्ष किया। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कर्पूरी ठाकुर समाजवादी विचारधारा से प्रेरित रहे और राजनीति को सत्ता का नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना।
वे दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे और अपने कार्यकाल में सामाजिक न्याय को नीति के केंद्र में रखा। पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने का साहसिक निर्णय हो या शिक्षा और प्रशासन में समान अवसर की सोच कर्पूरी ठाकुर ने हमेशा वंचित तबकों की आवाज़ को प्राथमिकता दी। उनकी पहचान एक ऐसे नेता की रही, जो सत्ता में रहते हुए भी आम जन के बीच सहज और सुलभ बने रहे।
कर्पूरी ठाकुर की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सादगी थी। मुख्यमंत्री रहते हुए भी वे साधारण जीवन जीते थे और निजी स्वार्थ से दूर रहकर जनहित के निर्णय लेते थे। यही कारण है कि उन्हें ‘जननायक’ कहा गया और आज भी बिहार ही नहीं, पूरे देश में उन्हें सामाजिक न्याय की राजनीति का प्रतीक माना जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनकी जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि यह संदेश देती है कि कर्पूरी ठाकुर का विचार और संघर्ष आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है कि राजनीति का वास्तविक उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और अवसर पहुंचाना होना चाहिए।
