यूपी में RTE दाखिले के नए नियम: अब बच्चे का आधार अनिवार्य नहीं, प्रवेश प्रक्रिया हुई आसान
लखनऊ, 10.jan.2026 । उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने के उद्देश्य से नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नए नियमों के तहत अब बच्चे का आधार कार्ड दाखिले के लिए अनिवार्य नहीं रहेगा, जिससे हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से तकनीकी अड़चनों के कारण शिक्षा से वंचित रह जाने वाले बच्चों की संख्या में कमी आएगी।
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, RTE के तहत निजी स्कूलों में दाखिले के लिए अब केवल किसी एक अभिभावक का आधार नंबर देना पर्याप्त होगा। पहले बच्चे के आधार कार्ड को लेकर कई अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था, खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में, जहां आधार बनवाने या अपडेट कराने में समय लगता है। सरकार ने इस बाधा को हटाकर दाखिले की प्रक्रिया को अधिक मानवीय और व्यावहारिक बनाया है।
सरकार ने प्रवेश प्रक्रिया में आयु-आधारित मानदंड भी स्पष्ट कर दिए हैं, ताकि बच्चों को उनकी सही उम्र के अनुसार कक्षा में दाखिला मिल सके। इससे स्कूलों में प्रवेश के दौरान भ्रम की स्थिति खत्म होगी और सभी बच्चों को समान अवसर मिल सकेगा। यह व्यवस्था यह भी सुनिश्चित करेगी कि शिक्षा की शुरुआत सही समय पर हो और बच्चों की पढ़ाई में अनावश्यक रुकावट न आए।
दाखिले की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने दो-स्तरीय ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम लागू किया है। इसके तहत पहले चरण में आवेदन स्वीकार किए जाएंगे और दूसरे चरण में उपलब्ध सीटों के आधार पर स्कूलों का आवंटन किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे किसी भी तरह की पक्षपात या अनियमितता की संभावना कम होगी और योग्य बच्चों को निष्पक्ष रूप से स्कूल मिल सकेंगे।
इन नए नियमों के बावजूद RTE अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों का आरक्षण पूरी तरह बरकरार रखा गया है। यह आरक्षण कक्षा-1 या पूर्व-प्राथमिक स्तर पर लागू होगा और इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर तथा सामाजिक रूप से वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था सामाजिक समानता और शिक्षा में समावेशन को मजबूत करेगी।
दाखिला प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाएगी, जहां अभिभावक आवेदन भरकर अपनी प्राथमिकताएं दर्ज कर सकेंगे। आवेदन और दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित शिक्षा अधिकारियों द्वारा किया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप और पारदर्शी बनी रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम RTE अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप माना जा रहा है। बच्चे के आधार कार्ड की अनिवार्यता हटाकर और लॉटरी प्रणाली को स्पष्ट बनाकर सरकार ने यह संकेत दिया है कि उसका लक्ष्य अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से RTE दाखिला प्रक्रिया न केवल आसान होगी, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए स्कूल का दरवाजा भी और व्यापक रूप से खुलेगा।
