नई दिल्ली,09.jan.2026। भारतीय सेना की ताकत केवल अत्याधुनिक हथियारों, आधुनिक तकनीक या प्रशिक्षित जवानों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन “मूक योद्धाओं” तक भी फैली हुई है, जो बिना बोले, बिना किसी श्रेय की अपेक्षा किए, हर कठिन परिस्थिति में देश की सेवा करते आए हैं। वर्ष 2026 के गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार इन मूक योद्धाओं को राष्ट्रीय मंच पर वह सम्मान मिलने जा रहा है, जिसके वे लंबे समय से हकदार हैं। कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली भव्य परेड में इस बार भारतीय सेना का विशेष पशु दस्ता देश के सामने मार्च करता दिखाई देगा।
यह ऐतिहासिक दस्ता Indian Army के अंतर्गत कार्यरत Remount Veterinary Corps (RVC) द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। अब तक परेड में सेना के विभिन्न रेजिमेंट, हथियार प्रणालियाँ और सैन्य क्षमताएँ ही देखने को मिलती थीं, लेकिन 2026 में पहली बार सेना के उन जीवित साथियों को भी सम्मानित किया जाएगा, जिनकी भूमिका दुर्गम इलाकों में अक्सर निर्णायक साबित होती है।
इस विशेष दस्ते में बैक्ट्रियन ऊँट, जांस्कर खच्चर, शिकारी बाज और भारतीय सेना के प्रशिक्षित कुत्ते शामिल होंगे। ये सभी जानवर अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों और सैन्य अभियानों में भारतीय सेना की रीढ़ रहे हैं। बैक्ट्रियन ऊँट विशेष रूप से लद्दाख और ऊँचाई वाले ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में रसद पहुँचाने, गश्त और सीमाई निगरानी में अहम भूमिका निभाते हैं। दो कूबड़ वाले ये ऊँट अत्यधिक ठंड, बर्फीली हवाओं और कठिन रास्तों में भी सहजता से काम करने की क्षमता रखते हैं।
वहीं, जांस्कर क्षेत्र के खच्चर और टट्टू वर्षों से हिमालयी क्षेत्रों में सेना के लिए जीवनरेखा बने हुए हैं। जब आधुनिक वाहन भी दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर जवाब दे देते हैं, तब यही खच्चर हथियार, राशन और जरूरी सामान सैनिक चौकियों तक पहुँचाते हैं। कारगिल से लेकर अरुणाचल और उत्तराखंड तक, इन पशुओं का योगदान इतिहास के कई निर्णायक अध्यायों से जुड़ा रहा है।
इस पशु दस्ते में शामिल शिकारी बाज सेना की पारंपरिक और सामरिक विरासत का प्रतीक हैं। बाज जैसे पक्षी वर्षों से निगरानी, संदेश और सुरक्षा अभियानों में इस्तेमाल होते रहे हैं। आज भी सेना के कुछ विशेष प्रशिक्षण केंद्रों में इन पक्षियों को आधुनिक जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वे सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बना सकें।
सबसे भावनात्मक और आकर्षक दृश्य सेना के प्रशिक्षित कुत्तों का होगा, जिन्हें अक्सर “Silent Warriors” कहा जाता है। विस्फोटक पहचान, आतंकवाद विरोधी अभियानों, खोज-बचाव कार्यों और सीमावर्ती इलाकों में गश्त के दौरान इन कुत्तों की भूमिका अमूल्य रही है। कई बार इन चार-पैर वाले योद्धाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर सैकड़ों सैनिकों और नागरिकों की जान बचाई है। गणतंत्र दिवस परेड में इन कुत्तों का मार्च करना न केवल सैन्य अनुशासन का प्रतीक होगा, बल्कि उस भावनात्मक रिश्ते को भी दर्शाएगा, जो सेना और उसके पशु साथियों के बीच वर्षों से बना हुआ है।
2026 की गणतंत्र दिवस परेड Kartavya Path पर आयोजित होगी, जहाँ देश-विदेश के अतिथि, सैन्य अधिकारी और लाखों दर्शक इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनेंगे। यह पहली बार होगा जब आम जनता इतने नजदीक से सेना के पशु दस्ते को औपचारिक सैन्य मार्च करते देखेगी। यह दृश्य न केवल रोमांचकारी होगा, बल्कि नई पीढ़ी को यह समझाने का भी माध्यम बनेगा कि देश की रक्षा में इंसानों के साथ-साथ जानवरों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारतीय सेना की परंपरा, संवेदनशीलता और समावेशी सोच का संदेश जाएगा। यह दिखाएगा कि सेना अपने हर सहयोगी को, चाहे वह इंसान हो या जानवर, समान सम्मान देती है। साथ ही, यह परेड आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी सैन्य परंपराओं की भी झलक पेश करेगी, जहाँ आधुनिक तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग किया जाता है।
कुल मिलाकर, गणतंत्र दिवस परेड 2026 केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं होगी, बल्कि यह उन अनकहे बलिदानों को भी श्रद्धांजलि होगी, जो वर्षों से सीमा पर, बर्फीली चोटियों पर और दुर्गम जंगलों में दिए जाते रहे हैं। जब कर्तव्य पथ पर ये मूक योद्धा कदमताल करेंगे, तो यह क्षण भारतीय सेना के इतिहास में एक नई, संवेदनशील और गर्वपूर्ण इबारत लिखेगा।
