नई दिल्ली, 27 जनवरी 2026: आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने पाकिस्तान के ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर किए गए दावों का तगड़ा जवाब देते हुए उस पर आतंकवाद को राज्य नीति के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि के बयान को “झूठा और स्व-सेवा प्रेरित” बताया और सुरक्षा परिषद के मंच पर पाकिस्तान की कूटनीतिक किरकिरी कर दी।
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की सैन्य और आतंकवादी क्षमताओं को निशाना बनाने के अपने फैसले की साफ़-साफ़ व्याख्या करते हुए कहा कि मई 2025 में हुई कार्रवाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कई स्ट्रक्चर्स, एयरबेस और रनवे को निशाना बनाया था और वहां की सेना को निर्णायक झटका लगाया था, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने 10 मई को संघर्ष रोकने की गुहार तक लगाई थी। भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने इस पूरे अभियान को तो twisting narrative में बदल दिया, जो पूरी तरह सत्य के विपरीत है। https://x.com/ANI/status/2015952381050253542?s=20
आतंकवाद को ‘न्यू नॉर्मल’ घोषित करने का विरोध
परवथनेनी हरीश ने पाकिस्तान के उस रवैये को ‘न्यू नॉर्मल’ बताने के प्रयास की कड़ी आलोचना की जिसमें आतंकवाद को सामान्यीकृत करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को कभी भी सामान्य नहीं माना जा सकता और संयुक्त राष्ट्र के पवित्र मंच का उपयोग किसी देश द्वारा आतंक को राजनीतिक औजार के रूप में सही दिखाने के लिए स्वीकार्य नहीं है। यह बात भारत की ओर से स्पष्ट और मजबूत शब्दों में कही गई।भारत EU Mother of All Deals
सिंधु जल संधि का निलंबन और पाकिस्तान की भूमिका
भारत ने यह भी दोहराया कि सिंधु जल संधि को निलंबित रखने का फैसला आतंकवाद की परिस्थितियों की वजह से लिया गया है, क्योंकि पाकिस्तान ने 1960 में हुए इस समझौते की मूल भावना आपसी विश्वास और सहयोग का उल्लंघन किया है। भारत ने स्पष्ट किया कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक यह संधि लागू नहीं की जाएगी। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान को पहले अपने आतंकवाद के समर्थन और सहायता नेटवर्क को समाप्त करना होगा।
संवैधानिक तख्तापलट और पाकिस्तान के राजनीतिक परिदृश्य पर सवाल
भारत ने पाकिस्तान के संवैधानिक परिदृश्य पर भी गंभीर सवाल उठाए। हरीश ने पाकिस्तान में हाल ही में हुए 27वें संशोधन को लेकर बात करते हुए कहा कि वहां संविधान की भावना को तोड़ा गया है और सेना प्रमुख को आजीवन सुरक्षा देने जैसे कदमों से कानून के शासन की अवधारणा को मार दिया गया है। यह संकेत है कि भारत सुरक्षा परिषद के मंच पर सिर्फ सैन्य ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों को भी उठाने के लिए तैयार है।India EU Free Trade Agreement
वैश्विक कूटनीति में भारत की स्पष्ट नीति
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह किसी भी देश के आतंकवाद के इस्तेमाल को स्वीकार नहीं करेगा, और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए वह आवश्यक कदम उठाने से नहीं हिचकिचाएगा। भारत का यह रुख सुरक्षा परिषद जैसी उच्चतम मंच पर उस समय सामने आया है जब दुनिया आतंकवाद, सीमा संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के मुद्दों पर संवेदनशील है। सुरक्षा परिषद में भारत की तीखी प्रतिक्रिया ने यह संदेश साफ़ कर दिया है कि वह ऑपरेशन सिंदूर, आतंकवाद और सिंधु जल संधि के मसले को कूटनीतिक, सैन्य और राजनीतिक स्तर पर गंभीरता से लेता है। भारत का रुख न केवल स्पष्ट है बल्कि उसने पाकिस्तान के दावों को अधूरा और भ्रामक बताया है जो भविष्य में दोनों देशों के बीच होने वाली बहसों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आगे की बैठकों को और अधिक तीव्र बना सकता है।
