उदयपुर में सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़ करने पर आयोजित राष्ट्रीय-स्तरीय कार्यशाला में केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के अधिकारी और राज्यों के प्रतिनिधि
उदयपुर,10.jan.26। भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और “सहकार से समृद्धि” के राष्ट्रीय आह्वान के अनुरूप, 8–9 जनवरी 2026 को राजस्थान के उदयपुर में सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने पर एक दो-दिवसीय राष्ट्रीय-स्तरीय कार्यशाला एवं समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को समावेशी विकास, ग्रामीण समृद्धि और जमीनी स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनाना रहा।
कार्यशाला में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, सहकारी समितियों के सचिव व रजिस्ट्रार तथा क्षेत्र के प्रमुख हितधारक शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने किया, जबकि राजस्थान सरकार की सहकारिता सचिव श्रीमती आनंदी ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए राज्य की सहकारिता परंपरा और नवाचारों पर प्रकाश डाला।
अपने मुख्य संबोधन में डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को और मजबूत करना, विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना तथा सहकारिता क्षेत्र के पुनरुद्धार के लिए नवाचारी दृष्टिकोण अपनाना है। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाएं लंबे समय तक हाशिए पर रहीं, लेकिन अब उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए सकारात्मक जन-धारणा निर्माण और पारंपरिक व डिजिटल मीडिया के माध्यम से सफलता की कहानियों को सामने लाना आवश्यक है। बनासकांठा डेयरी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक सूखा-प्रभावित जिले ने एकीकृत वैल्यू-चेन के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 90 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया।
उन्होंने सहकारी बैंकों के द्वि-नियमन से जुड़े मुद्दों के समाधान, बोर्ड चुनाव प्रक्रियाओं में सुधार, फील्ड विज़िट के माध्यम से जमीनी वास्तविकताओं को समझने और सहमति-आधारित निर्णय संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। साथ ही ग्रामीण एवं शहरी सहकारी बैंकों के लिए नियमों को सरल बनाने हेतु भारतीय रिज़र्व बैंक और वित्त मंत्रालय के साथ निरंतर संवाद की आवश्यकता को रेखांकित किया।
डॉ. भूटानी ने सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए उठाए गए प्रमुख कदमों की जानकारी देते हुए स्वयं सहायता समूहों के सहकारी संस्थाओं के साथ एकीकरण, कम लागत वाले CASA फंड को बढ़ाने के लिए सहकारी संस्थाओं को केवल सहकारी बैंकों में खाते खोलने का प्रावधान, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए विशेष सहायता तथा प्रस्तावित सहकारी विश्वविद्यालय और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के सहयोग से क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और वैल्यू-चेन विकास के जरिए सहकारिता क्षेत्र के आर्थिक योगदान को तीन गुना करने के विज़न को दोहराया।
कार्यशाला के दौरान एक समर्पित समीक्षा सत्र में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों (RDB) और सहकारी समितियों के पंजीयक कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण, मॉडल पैक्स (MPACS), बहुउद्देशीय डेयरी सहकारी समिति (MDCS) और बहुउद्देशीय मत्स्य सहकारी समिति (MFCS) जैसी पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई। विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण पहल, पैक्स द्वारा प्रदान की जा रही अतिरिक्त सेवाओं जैसे कॉमन सर्विस सेंटर, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र और प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के विस्तार पर भी व्यापक चर्चा हुई।
डायलॉग में राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड जैसी डिजिटल पहलों, सहकारी बैंकिंग सुधारों और श्वेत क्रांति 2.0 के संवर्धन पर भी विचार-विमर्श किया गया। साथ ही राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस को मजबूत करने, बहु-राज्य सहकारी समितियों में सुधार, GeM पर सहकारी संस्थाओं के ऑनबोर्डिंग और ई-कॉमर्स गवर्नेंस को सुदृढ़ करने पर राज्यों ने अपने अनुभव साझा किए।
कार्यशाला के दूसरे दिन “सहकार से समृद्धि – पैक्स आगे” विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को लक्षित पहलों के माध्यम से सशक्त बनाने पर फोकस किया गया। इस दौरान तमिलनाडु द्वारा कैशलेस पैक्स और MIS, आंध्र प्रदेश द्वारा सहकारी स्टार्ट-अप इकोसिस्टम, जम्मू-कश्मीर द्वारा जिला-विशिष्ट व्यावसायिक योजनाएं, उत्तर प्रदेश द्वारा सदस्यता अभियान तथा नाबार्ड और NABCONS द्वारा आधुनिक भंडारण व आपूर्ति-श्रृंखला एकीकरण मॉडल प्रस्तुत किए गए। उत्तर-पूर्वी राज्यों में सहकारिता विकास और प्रौद्योगिकी-आधारित डेयरी व मत्स्य पहलों पर भी विशेष सत्र हुए।
समापन सत्र में सहकारिता मंत्रालय के अपर सचिव श्री पंकज कुमार बंसल ने सामूहिक संस्थाओं के बीच सहयोग पर चर्चा की अध्यक्षता की, जिसमें स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को पैक्स के साथ एकीकृत करने तथा एनसीडीसी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने पर बल दिया गया। अपने समापन संबोधन में डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने दोहराया कि पैक्स सहकारिता व्यवस्था की रीढ़ हैं और ग्रामीण वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के लिए उनके पूर्ण कंप्यूटरीकरण की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि भारतीय खाद्य निगम द्वारा अनाज भंडारण अवसंरचना को गति देने के लिए किराया गारंटी प्रदान की गई है, जिसके तहत सितंबर 2026 तक 5 लाख टन और सितंबर 2027 तक 50 लाख टन भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।यह राष्ट्रीय कार्यशाला सहकारिता क्षेत्र को भविष्य-तैयार बनाने, सुशासन को सुदृढ़ करने और ग्रामीण भारत के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।
