भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों में ऐतिहासिक अध्याय, 2030 तक रणनीतिक साझेदारी का रोडमैप मंजूर
नई दिल्ली/ऑकलैंड, 12 जुलाई 2026। भारत और न्यूज़ीलैंड ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘भारत-न्यूज़ीलैंड रणनीतिक साझेदारी: 2030 का रोडमैप’ को मंजूरी दे दी है। ऑकलैंड में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की बैठक के दौरान इस व्यापक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की गई।
यह रोडमैप अगले चार वर्षों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक, रक्षा, व्यापार, शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, खेल, जलवायु परिवर्तन और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने का साझा खाका प्रस्तुत करता है। दोनों देशों का उद्देश्य केवल पारंपरिक कूटनीतिक संबंधों तक सीमित न रहकर भविष्य की वैश्विक चुनौतियों का संयुक्त रूप से सामना करना है।
राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को मिलेगा नया आयाम
रोडमैप के पहले स्तंभ के तहत भारत और न्यूज़ीलैंड ने प्रधानमंत्री, मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के नियमित दौरे और उच्चस्तरीय वार्ताओं को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है।
दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच वार्षिक सचिव स्तर की बैठकें आयोजित की जाएंगी ताकि 2030 रोडमैप के सभी लक्ष्यों की समयबद्ध समीक्षा और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही संसदीय आदान-प्रदान और सरकारी संस्थाओं के बीच सहयोग को भी नई गति मिलेगी।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग होगा और मजबूत
रणनीतिक साझेदारी का दूसरा स्तंभ रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित है।
इसके अंतर्गत दोनों देश:
- संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ाएंगे।
- नौसैनिक सहयोग को मजबूत करेंगे।
- समुद्री सुरक्षा पर वार्षिक संवाद शुरू करेंगे।
- साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाएंगे।
- आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह (JWG) का गठन करेंगे।
- नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग को संस्थागत रूप देंगे।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और मुक्त एवं नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी विशेष सहमति बनी है।
2030 तक 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर का व्यापार लक्ष्य
आर्थिक सहयोग को नई दिशा देते हुए दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़) तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इसके लिए दोनों देश:
- भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को प्रभावी बनाने पर कार्य करेंगे।
- कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाएंगे।
- भरोसेमंद व्यापार व्यवस्था (AEO-MRA) लागू करेंगे।
- निवेश और उद्योग सहयोग को बढ़ावा देंगे।
कृषि, डेयरी और बागवानी में बढ़ेगा सहयोग
रोडमैप में कृषि क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
दोनों देश—
- बागवानी अनुसंधान
- फसल कटाई के बाद की तकनीक
- डेयरी उद्योग
- पशुपालन
- वानिकी
- कृषि नवाचार
जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग बढ़ाएंगे।
पर्यटन और सीधी उड़ानों को मिलेगा प्रोत्साहन
भारत और न्यूज़ीलैंड ने पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए एयरलाइनों को सीधी उड़ानें शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है।
पर्यटन उद्योग, निवेश तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए दोनों देशों के पर्यटन विभाग मिलकर कार्य करेंगे।
भारतीय प्रवासी समुदाय बनेगा मजबूत साझेदार
दोनों देशों ने भारतीय मूल के लोगों को द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बताया।
इसके अलावा:
- खेल सहयोग
- पारंपरिक चिकित्सा
- समुद्री कर्मचारियों की योग्यता की मान्यता
- समुद्री विरासत संरक्षण
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान
- स्थानीय निकायों के बीच सहयोग
को भी बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
शिक्षा, विज्ञान और नई तकनीकों में साझेदारी
2030 रोडमैप के तहत शिक्षा एवं अनुसंधान को भविष्य की साझेदारी का प्रमुख आधार बनाया गया है।
दोनों देश:
- विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाएंगे।
- शोध संस्थानों को जोड़ेंगे।
- डिजिटल तकनीक
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
- जलवायु परिवर्तन
- कृषि अनुसंधान
- नवाचार
- उभरती प्रौद्योगिकियों
में संयुक्त परियोजनाओं को प्रोत्साहित करेंगे।
जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा पर भी रहेगा फोकस
भारत और न्यूज़ीलैंड ने:
- अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)
- वैश्विक बायोफ्यूल्स गठबंधन
- कम कार्बन उत्सर्जन
- स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन
जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने का निर्णय लिया है।
संयुक्त राष्ट्र और इंडो-पैसिफिक में बढ़ेगा सहयोग
दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार का समर्थन दोहराया और सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषकर यूएनसीएलओएस (UNCLOS) के अनुरूप विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर भी दोनों देशों ने समान दृष्टिकोण व्यक्त किया।
कोई कानूनी या वित्तीय बाध्यता नहीं
रोडमैप में स्पष्ट किया गया है कि यह रणनीतिक साझेदारी भविष्य के सहयोग का साझा ढांचा है। इससे किसी प्रकार की वित्तीय प्रतिबद्धता या घरेलू अथवा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कोई कानूनी बाध्यता उत्पन्न नहीं होती।
भारत-न्यूज़ीलैंड रणनीतिक साझेदारी 2030 दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापक सहयोग का दीर्घकालिक विजन है। रक्षा, व्यापार, विज्ञान, शिक्षा, पर्यटन, जलवायु परिवर्तन, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और वैश्विक मंचों पर समन्वय को मजबूत करने वाला यह रोडमैप आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है।
