नई दिल्ली, 21 दिसंबर 2025 | नागर विमानन मंत्रालय के अंतर्गत नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने नई दिल्ली स्थित भारतीय विमानन अकादमी में सेफ्टी सेमिनार 2025 का सफल आयोजन किया। सेमिनार का विषय “सहयोग के माध्यम से विमानन सुरक्षा को बढ़ाना” रहा, जिसमें नागर विमानन मंत्रालय (MoCA), DGCA के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के नेता और देश के विमानन इकोसिस्टम से जुड़े पेशेवरों ने भाग लिया।

नागर विमानन मंत्रालय के अंतर्गत नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने नई दिल्ली स्थित भारतीय विमानन अकादमी में सेफ्टी सेमिनार 2025 का सफल आयोजन किया। सेमिनार का विषय “सहयोग के माध्यम से विमानन सुरक्षा को बढ़ाना” रहा, जिसमें नागर विमानन मंत्रालय (MoCA), DGCA के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के नेता और देश के विमानन इकोसिस्टम से जुड़े पेशेवरों ने भाग लिया।
“सुरक्षा एक सतत यात्रा है”: सचिव समीर कुमार सिन्हा
सेमिनार का उद्घाटन नागर विमानन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा ने किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि “सुरक्षा कोई तय मंज़िल नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली यात्रा है जिसके लिए सतर्कता, नियमों का पालन और जवाबदेही अनिवार्य है।” वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख चिंताओं को रेखांकित किया, जिससे सुरक्षित विमानन वातावरण बनाए रखने की सामूहिक जिम्मेदारी और मजबूत हुई।
भारत का विमानन विस्तार: आंकड़े जो भरोसा बढ़ाते हैं
अपने संबोधन में सचिव ने बताया कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू नागरिक विमानन बाजार है। पिछले एक दशक में घरेलू यात्री यातायात में औसतन 9% वार्षिक वृद्धि और कार्गो वॉल्यूम में 2.9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश का विमान बेड़ा 2014 में 395 से बढ़कर 2025 में 844 हो गया है जो इस क्षेत्र की तेज़ रफ्तार प्रगति को दर्शाता है।
2025: सीख, बदलाव और नए संकल्प का वर्ष
श्री सिन्हा ने कहा कि 2025 भारतीय नागरिक विमानन के लिए सीखने और परिवर्तन का वर्ष रहा है। चुनौतियों ने जहां सहनशक्ति की परीक्षा ली, वहीं सुरक्षा, दक्षता और जन-विश्वास को मजबूत करने के संकल्प को भी सुदृढ़ किया। उन्होंने रखरखाव से जुड़ी त्रुटियों के कारण उत्पन्न परिचालन जोखिमों—जैसे मैकेनिकल खराबी और सिस्टम फेलियर—पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
नियामक प्रतिबद्धता: प्रोएक्टिव सेफ्टी और वैश्विक संरेखण
DGCA के महानिदेशक फैज अहमद किदवई ने अपने स्वागत भाषण में प्रोएक्टिव सेफ्टी ओवरसाइट और ग्लोबल अलाइनमेंट के प्रति नियामक की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024, राज्य सुरक्षा कार्यक्रम और राष्ट्रीय विमानन सुरक्षा योजना (2024–2028) जैसी प्रमुख पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन पर प्रकाश डाला।
तकनीकी सत्र: चुनौतियाँ, समाधान और सर्वश्रेष्ठ अभ्यास
दिनभर चले कार्यक्रम में तीन तकनीकी सत्र आयोजित हुए, जिनमें रनवे इनकर्शन, एविएशन में सकारात्मक सुरक्षा संस्कृति, और मेंटेनेंस एरर जैसे अहम विषयों पर चर्चा हुई। नियामक और उद्योग विशेषज्ञों ने मिलकर मूल कारणों की पहचान, सर्वोत्तम अभ्यासों का साझा करना और जोखिम-आधारित, सक्रिय सुरक्षा प्रबंधन की रणनीतियों पर जोर दिया।
संवाद और सहभागिता से मजबूत हुआ भरोसा
हर पैनल के बाद इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र हुए, जिससे प्रतिभागियों के बीच खुला संवाद और विचार-विमर्श संभव हुआ। उद्योग हितधारकों ने DGCA की पहल की सराहना करते हुए इसे पारदर्शिता बढ़ाने, सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने और राष्ट्रीय मानकों को वैश्विक विमानन मानकों से जोड़ने की दिशा में समयोचित और आवश्यक मंच बताया।
सुरक्षित भविष्य की ओर ठोस कदम
यह सेमिनार DGCA के निरंतर सुरक्षा-प्रोत्साहन प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। गहरी साझेदारी और सतत संवाद के जरिए भारत के विमानन सुरक्षा ढांचे को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में यह आयोजन निर्णायक कदम के रूप में सामने आया।
