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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर—जिसमें वे एक सामान्य भाजपा कार्यकर्ता के रूप में ज़मीन पर नीचे बैठे दिखे—को टैग करने के बाद मचे सियासी बवाल ने कांग्रेस के भीतर भी हलचल पैदा कर दी थी यह स्पष्ट हुआ कि वे भाजपा की इमेज-पॉलिटिक्स को लेकर सतर्क रणनीति अपनाए हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही वह बिंदु था, जहां से दिग्विजय सिंह ने अगली चाल की तैयारी शुरू कर दी। अब वही रणनीति नए UGC बिल के मुद्दे पर खुलकर सामने आ रही है। दिग्विजय सिंह लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि यह बिल विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर करता है और शिक्षा व्यवस्था को केंद्र सरकार के नियंत्रण में ले जाने की कोशिश है।
UGC बिल को लेकर छात्रों, शिक्षकों और विपक्षी दलों के बढ़ते विरोध ने भाजपा को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। कांग्रेस इसे शिक्षा पर वैचारिक हस्तक्षेप बता रही है। फोटो टैगिंग विवाद से लेकर UGC बिल तक, हर मोर्चे पर भाजपा को घेरने की रणनीति के कारण दिग्विजय सिंह को एक बार फिर “राजनीति का चाणक्य” कहा जा रहा है।
स्पष्ट है कि मोदी की एक प्रतीकात्मक तस्वीर से शुरू हुई बहस अब UGC बिल के ज़रिये भाजपा के लिए राजनीतिक संकट बनती जा रही है।
