नई दिल्ली / भोपाल , 21 दिसंबर 2025 | आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छता की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए स्वच्छ सर्वेक्षण (SS) के 10वें संस्करण का औपचारिक शुभारंभ किया। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2025–26 की टूलकिट जारी की। इस अवसर पर देशभर के नगर आयुक्तों, राज्य प्रतिनिधियों और शहरी स्थानीय निकायों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
विश्व का सबसे बड़ा शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण
स्वच्छ सर्वेक्षण आज दुनिया का सबसे बड़ा शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण बन चुका है और अपने दस वर्ष पूरे कर चुका है। यह अब केवल एक वार्षिक रैंकिंग अभ्यास नहीं, बल्कि कचरा-मुक्त शहरों की दिशा में परिवर्तन को गति देने वाला एक प्रभावी प्रबंधन उपकरण बन गया है। 2016 में जहां केवल 73 शहरी स्थानीय निकायों का आकलन किया गया था, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 4,900 हो गई है।
2025–26 की थीम: ‘स्वच्छता की नई पहल’
इस वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण की थीम “स्वच्छता की नई पहल – बढ़ाएं हाथ, करें सफाई साथ” रखी गई है। इसका उद्देश्य नागरिकों, शहरी निकायों और राज्य सरकारों के बीच सामूहिक जिम्मेदारी और सहयोग को और मजबूत करना है, ताकि स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाया जा सके,जिसका मूल भाव स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता है।
नागरिकों की राय को मिला और अधिक महत्व
पिछले वर्षों में नागरिक फीडबैक स्वच्छ सर्वेक्षण का एक सशक्त मूल्यांकन उपकरण बनकर उभरा है। इसे और प्रभावी बनाने के लिए 2025–26 की टूलकिट में नागरिकों की राय को अधिक वज़न दिया गया है। अब नागरिक वोट फॉर माय सिटी ऐप व पोर्टल, मायगव ऐप, स्वच्छता ऐप और क्यूआर कोड के माध्यम से पूरे वर्ष अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कर सकेंगे। नागरिक सत्यापन की भूमिका को भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया गया है।
नदी-बहुल और तटीय शहर भी सर्वेक्षण के दायरे में
स्वच्छ सर्वेक्षण अब तक गंगा-बहुल शहरों के आकलन तक सीमित था, लेकिन इसके दायरे को बढ़ाते हुए अब देशभर के नदी-बहुल शहरों को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही तटीय क्षेत्रों के लिए एक अलग मूल्यांकन मैट्रिक्स तैयार किया गया है, जिससे भौगोलिक विशेषताओं के अनुरूप स्वच्छता मानकों का आकलन संभव होगा।
मेंटरशिप और पीयर लर्निंग से शहरी निकायों को मजबूती
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने सितंबर 2025 में स्वच्छ भारत मिशन–शहरी (SBM-U) के तहत स्वच्छ शहर जोड़ी (SSJ) कार्यक्रम के अंतर्गत शहरी अपशिष्ट प्रबंधन में देश का सबसे बड़ा संरचित मेंटरशिप फ्रेमवर्क शुरू किया। इसमें 72 मेंटर और 200 मेंटी शहरों ने ज्ञान साझा करने और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इस वर्ष जोड़ियों के औसत प्रदर्शन के आधार पर एक नई पुरस्कार श्रेणी भी शुरू की गई है।
कड़ा निगरानी तंत्र और पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया
गुणवत्ता आश्वासन और शिकायत निवारण को मजबूत करने के लिए स्वच्छ सर्वेक्षण में प्रोटोकॉल-संचालित मूल्यांकन ढांचा लागू किया गया है। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय निरीक्षण टीम नियुक्त की गई है। देशभर में 3,000 से अधिक प्रशिक्षित फील्ड मूल्यांकनकर्ता जीपीएस-सक्षम, रियल-टाइम निगरानी के साथ 45 दिनों का ऑन-ग्राउंड सर्वे करेंगे। पूरी प्रक्रिया डिजिटल, पारदर्शी और सख्त गुणवत्ता जांच पर आधारित होगी।
सर्वेक्षण की समय-सीमा और आगे की राह
टूलकिट जारी होने के बाद फील्ड मूल्यांकन फरवरी 2026 के मध्य से मार्च 2026 तक शुरू होने की संभावना है, जबकि GFC और ODF प्रमाणन का आकलन फरवरी 2026 के मध्य से आरंभ होगा। स्वच्छ भारत मिशन–शहरी, जनभागीदारी का प्रतीक बनते हुए स्वच्छ सर्वेक्षण को एक ऐसे मंच में बदल चुका है, जहां प्रत्येक नागरिक की आवाज को समान महत्व मिलता है।
