*बार-बार गिरते पुल और सवालों में SP Singla: बिहार की निर्माण व्यवस्था पर बड़ा प्रश्न**
**पटना/भागलपुर:**
बिहार में पुल गिरने की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं, लेकिन जब एक ही कंपनी का नाम बार-बार इन हादसों से जुड़ने लगे, तो सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं। SP Singla Constructions Pvt Ltd (एसपी सिंगला) ऐसी ही एक कंपनी है, जिस पर लगातार लापरवाही और घटिया निर्माण के आरोप लगते रहे हैं।
**बार-बार गिरा पुल, कंपनी पर आरोप**
भागलपुर के अगुवानी घाट पुल का मामला सबसे बड़ा उदाहरण है।
* यह पुल निर्माण के दौरान **दो बार गिर चुका** था
* सरकार ने खुद माना कि निर्माण में गंभीर खामियां थीं
* इसके बाद कंपनी को **दोषी मानते हुए बैन (डिबार)** कर दिया गया
इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री तक ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि पुल “ठीक से नहीं बनाया जा रहा था”, जिसके कारण वह बार-बार गिर रहा था
**हाल के हादसे ने फिर बढ़ाई चिंता**
हाल ही में भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा गंगा में गिर गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
* करीब **25 मीटर का स्लैब गिर गया**
* तुरंत ट्रैफिक रोकना पड़ा
* लोगों की जान पर बड़ा खतरा मंडराया
हालांकि हर घटना सीधे उसी कंपनी से जुड़ी हो यह अलग विषय है, लेकिन लगातार हो रहे हादसे पूरे सिस्टम और निर्माण एजेंसियों पर सवाल खड़े करते हैं।
**पुराने विवाद भी कम नहीं**
SP Singla का नाम पहले भी विवादों में रहा है:
* 2020 में पटना में स्लैब गिरने से **3 बच्चों की मौत**
* कई बड़े प्रोजेक्ट्स में देरी और गुणवत्ता पर सवाल
* ED द्वारा छापेमारी तक की कार्रवाई
*करोड़ों के प्रोजेक्ट, लेकिन भरोसा कमजोर**
यह कंपनी बिहार में हजारों करोड़ के पुल और फ्लाईओवर प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुकी है, जिनमें:
* गंगा पर बड़े पुल
* पटना के मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
* केबल-स्टे ब्रिज जैसी हाई-टेक संरचनाएं
लेकिन सवाल यह है कि **इतने बड़े प्रोजेक्ट्स के बावजूद गुणवत्ता क्यों नहीं दिख रही?
*राजनीति और सिस्टम दोनों कटघरे में**
विपक्ष का आरोप: “बिहार में पुल गिरना अब आम बात”
* 3 साल में 20+ पुल गिरने के दावे** भी सामने आए
* सरकार पर निगरानी और जवाबदेही की कमी के आरोप
*निष्कर्ष: लापरवाही या सिस्टम फेल?**
SP Singla पर लगे आरोप सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं हैं, बल्कि यह पूरे सिस्टम की पोल खोलते हैं।
अगर एक ही कंपनी बार-बार विवादों में आती है और फिर भी बड़े प्रोजेक्ट्स मिलते रहते हैं, तो सवाल सिर्फ कंपनी पर नहीं, बल्कि:
* टेंडर प्रक्रिया
* निगरानी तंत्र
* और सरकारी जवाबदेही
तीनों पर उठता है।
